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सेंसर बोर्ड के सीईओ कुमार पहुंचे हाईकोर्ट, दावा किया- उन्हें फंसाया जा रहा

7 वर्ष पहले
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मुंबई. सेंसर बोर्ड के निलंबित सीईओ राकेश कुमार ने जमानत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जमानत याचिका में कुमार ने दावा किया है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। उनकी ओर से उठाए गए कड़े कदमों के चलते फिल्मों को सेंसर सर्टिफिकेट दिलाने में लगे दलालों की आमदनी पर असर पडऩे लगा था। 29 सितंबर को हाईकोर्ट कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकता है।
दी सफाई : पिछले हफ्ते दाखिल जमानत याचिका में कुमार ने अपने घर से मिले साढ़े दस लाख रुपयों पर भी सफाई दी है। कुमार ने दावा किया है कि जो पैसे अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान उनके घर से जब्त किए हैं उनमें से काफी बड़ी रकम उनकी मां अपने साथ जल्द होने वाले घुटनों के ऑपरेशन के लिए लाईं थीं। सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो के छापे में मिले दो घरों के कागजात पर कुमार का कहना है कि ये घर पहले से उनके पास थे। सरकारी नौकरी की सेवा शर्तों के मुताबिक उन्होंने यह संपत्ति पहले ही घोषित कर रखी थी।
अपने घर से बरामद 33 कीमती घडिय़ों पर कुमार का कहना है कि इनमें से पांच-छह घडिय़ां ही असली हैं, बाकी नकली हैं जिनकी कीमत ज्यादा नहीं है।
क्या कहा याचिका में : कुमार के वकील मंदार गोस्वामी द्वारा दाखिल जमानत याचिका में कहा गया है कि कुमार ने इस साल जनवरी में जब सेंसर बोर्ड के सीईओ का पदभार संभाला तो करीब 250 फिल्मों का बैकलॉग था। बैकलॉग से निजात पाने के लिए उन्होंने नई व्यवस्था बनाई। इसके तहत वे खुद मिलने वाले आवेदनों की ऑनलाइन निगरानी करते थे।

दावा किया गया है कि उनकी व्यवस्था पारदर्शी थी इसलिए दलालों की कमाई बंद हो गई थी। साथ ही 250 फिल्मों का बैकलॉग लगभग खत्म हो गया था। याचिका में कहा गया है कि कुमार चाहते थे कि सभी दलाल खुद को रजिस्टर कराएं जिससे व्यवस्था में और पारदर्शिता आए।