मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट मराठा व मुस्लिम आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला अगले हफ्ते सुना सकता है। लगातार तीन दिन तक सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह व न्यायमूर्ति एमएस सोनक की खंडपीठ ने शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। आरक्षण के फैसले के खिलाफ केतन तिरोडकर सहित कई गैर सरकारी संस्थाओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में सरकार के आरक्षण के निर्णय को असंवैधानिक व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ बताया गया है। साथ ही आरक्षण को लेकर जारी अध्यादेश पर रोक लगाने की मांग की गई है।
आरक्षण सीमा बढ़ाने की छूट
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता डेरिस खंबाटा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने राणे कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का निर्णय लिया है ताकी मराठा समाज को मुख्यधारा में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में सरकार को युक्तिसंगत स्थितियों में आरक्षण की सीमा बढ़ाने की छूट दी है।