मुंबई. महाराष्ट्र में चुनाव से पहले ही भाजपा और शिवसेना में मुख्यमंत्री पद को लेकर तकरार बढ़ गई है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी का ही होगा। वहीं भाजपा ने अभी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। मुंबई में एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम के दौरान उद्धव ने पहली बार संकेत दिए कि वह मुख्यमंत्री बनने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि "मैं किसी पद के पीछे नहीं भाग रहा हूं। लेकिन मैं बाला साहेब का बेटा हूं, जिम्मेदारी से नहीं भागूंगा। आप (जनता) मुझे मौका दो, मैं शिकायत का मौका नहीं दूंगा।’ वहीं, दिल्ली में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़केर ने कहा कि "मुख्यमंत्री कौन होगा यह बात चुनाव नतीजों के बाद तय होगा। अभी चुनौती चुनाव जीतने की है।’
सूत्रों के अनुसार भाजपा दो विकल्प लेकर चल रही है। पहला, जिस पार्टी के विधायक ज्यादा होंगे, मुख्यमंत्री उसका होगा। दूसरा विकल्प ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद संभालने का है। शर्त यह है कि जिस पार्टी के विधायक ज्यादा होंगे, सीएम उसका होगा।
सीट बंटवारे पर विवाद नहीं : दोनों ही पार्टियां मान रही है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। इस मसले पर उद्धव ने कहा कि "जिन सीटों पर हम नहीं लड़ेंगे, वह भाजपा को मिलेंगी।’’ वहीं जावड़ेकर ने भी कहा कि "इस विषय पर मतभेद नहीं है। गठबंधन में चुनाव लड़ने पर हालात देखकर सीटों की अदला-बदली होती है।’’
ज्यादा हवस तलाक का कारण बनती है: शिवसेना
शिवसेना के मुखपत्र में छपे संपादकीय में सीटों की बढ़ती खींचतान भी झलक आई। इसमें भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा है कि "गठबंधन सहयोगियों को जीत का सपना देखना चाहिए। इसके लिए पार्टियों को ज्यादा सीटों की हवस छोड़नी चाहिए। यह कहना ठीक नहीं है कि उतनी सीटें मिलेंगी, तभी गठबंधन में रहेंगे।’’
बड़े भाई की भूमिका चाहती है शिवसेना
पिछले चुनावों में शिवसेना की ताकत कमजोर हुई है। इसी वजह से भाजपा ज्यादा सीटें चाहती है। 2009 के चुनावों में शिवसेना ने 160 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 44 सीटें जीती थीं। वहीं 119 सीटों पर चुनाव लड़कर भाजपा ने 46 सीटें जीती थीं। हालिया लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 23 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना को सिर्फ 18 सीटें मिली। इसके बाद भी शिवसेना बड़े भाई की भूमिका चाहती है।
फाइल फोटो- शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे