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अमरावती संभाग के 7241 गांव सूखाग्रस्त, किसानों की स्थित बिगड़ी

7 वर्ष पहले
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अमरावती. अमरावती संभाग के 7241 गांवों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जिसमें यवतमाल जिले के 2050 गांवों का समावेश है। जिले के कुछ क्षेत्र सूखे से अत्याधिक प्रभावित हुए हैं जिनमें मालपठार इलाके से सटी तहसीलें जैसे पुसद, महागांव, उमरखेड़ तहसीलों का समावेश है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों से हुई चर्चा के अनुसार यवतमाल जिले में नगद फसलों में गिनी जानेवाली कपास की बुआई लगभग 40 लाख हे.क्षेत्र में बुआई की गई थी, जिस पर 20 हजार करोड़ की लागत आयी, लेकिन आवक मात्र 8 हजार करोड़ की हुई यानी इसमें सीधे-सीधे किसानों 12 हजार करोड़ रु. का नुकसान हो गया।
इसी प्रकार लगभग 20 लाख हे.क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई की गई जिसमें लागत 5 हजार करोड़ रु. की लगी लेकिन आवक मात्र 3 हजार करोड़ रु. की ही हुई, यानी सीधे-सीधे 2 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। किसानों की बदहाली का यह मुख्य कारण बना। जो फसलें किसानों के हाथ लगी हैं उन्हें भी उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं और किसान आर्थिक संकट से उबर ही नहीं पा रहे हैं।
सरकार ने कपास का समर्थन मूल्य 4050 रु. प्रति क्ंिव. घोषित किया है, लेकिन कोई न कोई कारण बताकर मात्र 3800-3900 रु. दाम दिए जा रहे हैं। यही स्थिति सोयाबीन की है। समर्थन मूल्य 3000 हजार रु. हैं लेकिन वास्तविक रूप में किसानों को 2200 से 2500 प्रति क्विं. के हिसाब से दाम दिए जा रहे हैं।