वो सब अल्हड़ थे...जवान...मगर उनकी जवानी और गर्म खून ही उनकी मौत का सबसे बड़ा कारण बन ग़ई। वो कहते हैं न कि जुल्म और आतंक की उम्र चाहें शुरू में कितनी ही लंबी लगे, मगर अच्छाई के सामने हमेशी ही छोटी पड़ जाती है। इंसाफ और न्याय के आगे तो बड़े-बड़े जुल्म ढाने वाले भी घुटने टेक देते हैं...फिर इनकी बिसात ही क्या थी.....
इससे पहले कि आप किसी निर्णय तक पहुंचें, आज की किस्सागोई में हम आपको बताएंगे एक ऐसे किस्से, या यूं कहें कि हकीकत के बारे में जिसे पढ़कर आपके रोएं खड़े हो जाएंगे।
ये कोई आम किस्सा नहीं है, बल्कि यहां बात हो रही है भारते के एक बड़े प्रसिद्ध शूटआउट की जिसका नाम था शूटआउट एट लोखंडवाला......यही वो घटना है जिसने मुंबई मायानगरी में भाईगीरी का नया अध्याय बन गए माया डोलस और दिलीप बुवा समेत कुल 7 लोग पुलिस की 'आतिशबाजियों' के भेंट चढ़ गए थे। 1991 में घटी ये घटना अपने आप में ऐसा पहला शूटऑउट था, जब किसी पुलिस एनकाउंटर को मीडिया ने लाइव कवर किया था।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए क्या था पूरा मामला और इस पूरे घटनाक्रम की वो खास चुनिंदा बातें जो शायद आपको पता तक न हो....साथ ही देखिए शूटआउट की रियल तस्वीरें स्लाइड्स के झरोखे से...