मुंबई. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा की कमान संभालेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनावी समझौते की बातचीत में शिवसेना के कथित अड़ियल रवैये के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। माना जा रहा है कि अगर शिवसेना ने सीटों के समझौते के लिए सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो लंबे अरसे से जारी गठबंधन टूट भी सकता है। प्रदेश भाजपा सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह ने राज्य विधानसभा चुनाव की अहमियत को देखते हुए यह फैसला किया है।
अब तक गडकरी प्रदेश भाजपा की निर्णय प्रक्रिया से दूरी बनाए हुए थे। सारा दारोमदार प्रदेश की कोर कमेटी पर था। प्रदेश के प्रभारी ओमप्रकाश माथुर व अध्यक्ष देंवेंद्र फडणवीस ने उद्धव व अन्य नेताओं से सीटों के तालमेल पर चर्चा भी की पर बात नहीं बनी। इससे पहले शाह ने मुंबई दौरे के वक्त कोर कमेटी के सदस्यों से लंबी बातचीत की थी। साथ ही वे शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे से भी मिले थे। केंद्रीय भाजपा नेतृत्व चाहता है कि लोकसभा चुनाव में
नरेंद्र मोदी की कामयाबी का लाभ महाराष्ट्र में भाजपा को मिले। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में भाजपा की अगुवाई में सरकार बने।
प्रदेश भाजपा के सूत्र बताते हैं कि भाजपा के बूते लोकसभा चुनाव में शिवसेना को फायदा मिला। लेकिन शिवसेना के नेता इस हकीकत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनकी नजर सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। शनिवार को तो उद्धव के शनिवार के बयान पर भाजपा के एक नेता ने कहा-लगता है कि शिवसेना खुद ही तालमेल नहीं चाहती।
बालासाहेब ठाकरे का सम्मान तो भाजपा करती रही है। लेकिन उनके निधन के बाद पार्टी काफी कमजोर हो गई है। इस बात को न मानकर शिवसेना के नेता भाजपा पर वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं। इस स्थिति को देखते हुए गडकरी को प्रदेश के चुनाव में कमान सौंपने का फैसला किया गया है। गडकरी कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि अगर शिवसेना ने अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा तो गठबंधन को तोड़ने व अकेले चुनाव में उतरने का फैसला किया जा सकता है।
फाइल फोटो- केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी