लिविंग लीजेंड: 101 साल के बॉलीवुड में 55 गुलजार के

8 वर्ष पहले
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मुंबई। फिल्म उद्योग के 101 वर्षीय इतिहास में गुलजार 55 वर्षों से सक्रिय हैं और उनकी सबसे बड़ी विशेषता ये है कि प्रारंभिक 5 वर्षों के बाद उन्हें कभी काम मांगने नहीं जाना पड़ा। काम ही उनके पास आता रहा। इस उद्योग में अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए आधी सदी गुजारना आसान नहीं है।

इस उद्योग में टिके रहने का मंत्र समझौता करना होता है, परंतु गुलजार ने हमेशा अपनी शर्तों पर अपने ढंग का काम किया है। लोग कहते हैं कि इस उद्योग में मेल-मिलाप बनाए रखने से बहुत लाभ होता है, परंतु गुलजार पाली हिल स्थित अपने बंगले बोस्कियाना में एक द्वीप की तरह रहे। किसी भी तरह के दिखावे का उन्होंने सहारा नहीं लिया।

वे हमेशा अपने साहित्यिक मिजाज को साधते रहे और भाग्य ने केवल इतनी सहायता की कि उन्हें अपने मनपसंद निर्देशक विमल राय का सहायक बनने का अवसर प्राप्त हुआ। और शैलेंद्र के अस्वस्थ होने के कारण विमल राय ने बंदिनी में एक गीत लिखने का मौका दिया। इसके पहले उन्होंने किसी फिल्म में गीत लिखे जरूर थे, परंतु बंदिनी का गीत मेरा गोरा रंग लइ-लइ, मोहे श्याम रंग दइ-दइ ही उनकी पहचान बन गया। इसी गीत ने उनको अनेक अवसर दिलाए। एक तरह से फिल्म उद्योग की बंद गुफा का 'खुल-जा सिम-सिम' यही गीत साबित हुआ।

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