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डाउनलोड करेंमुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईएनएस विक्रांत को कबाड़ में बेचने के नौसेना के निर्णय में कोई खामी नहीं होने की बात कहते हुए उसे म्यूजियम में परिवर्तित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह व न्यायमूर्ति एमएस शंकलेचा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार समुद्र में पुतला बनाए अथवा युध्दपोत को म्यूजियम, यह उसका नीतिगत निर्णय है। हमें लगता है कि नौसेना ने युध्दपोत को कबाड़ में नीलाम करने का फैसला मनमाने तरीके से नहीं लिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता किरण पैगवकर ने युध्दपोत की नीलामी पर रोक लगाने व उसे म्यूजियम में परिवर्तित करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे एडिशनल सालिसिटर जनरल केविक शेतलवाड ने कहा कि अब 70 साल पुराने युध्दपोत की मरम्मत कर पाना संभव नहीं है। शुरुआत में हमने इसके लिए कई कदम उठाए थे। उन्होंने कहा कि यह युध्दपोत असुरक्षित भी है। इसका इस्तेमाल प्रशीक्षण के लिए भी नहीं किया जा सकता है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा प्राथमिकता तय करना सरकार का काम है। फिलहाल हमें नौसेना का निर्णय मनमाना नजर नहीं आ रहा है। लिहाजा याचिका को खारिज किया जाता है।
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