मुंबई. महाराष्ट्र में औद्योगिक बिजली की दर अन्य राज्यों की तुलना में डेढ़ से दो रुपए अधिक है। राज्य सरकार इस दर में कमी लाने के लिए जल्द ही विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के समक्ष प्रस्ताव रखेगी। उक्त बातें राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। फडणवीस गुरुवार को केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल के साथ पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार, रत्नागिरी गैस एंड पॉवर लिमिटेड (आरजीपीएल) को 2200 करोड़ रुपए नहीं देगी। हम दाभोल पॉवर प्लांट से दूसरों को बिजली बेचने की अनुमित देने को तैयार हैं। आरजीपीएल से सरकार मंहगी बिजली नहीं खरीदेगी। यदि वे दूसरों को अपनी बिजली बेचना चाहते हैं तो इसके लिए सरकार अनुमति देने को तैयार है।
दाभोल राष्ट्रीय संपत्ति, फिर शुरू करेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन वर्षों तक दाभोल को तय दरों पर गैस की आपूर्ति हो तो दाभोल बिजली परियोजना को पुनर्जीवित किया जा सकता है। दाभोल के निजीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल हमें इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इसे बेचने का भी कोई इरादा नहीं है। इसे फिर से शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय संपत्ति है।
बिजली कटौती से मुक्त करने जारी हैं प्रयास
फडणवीस ने कहा, राज्य को बिजली कटौती से मुक्त करने के लिए फीडर सेपरेशन के खास प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि केंद्र से नियमित बिजली आपूर्ति हो, इससे नियमित बिजली उत्पादन में मदद मिल सकेगी।
कानून के मुताबित मिला है राज्य मंत्रियों को काम
मंत्रियों के बीच अधिकारों को लेकर उठे विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रियों को संविधान के अनुसार अधिकार दिए गए हैं। कहा, हम कानून के मुताबित कार्य कर रहे हैं। सरकार संविधान के अनुसार ही चल सकती है।