नागपुर. आघाड़ी सरकार के दौरान सिंचाई घोटाले को लेकर राकांपा तत्कालीन विपक्षी दलों भाजपा व शिवसेना के निशाने पर थी। अब सत्ता में आने के बाद राज्य की नई युति सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा का काम शुरू किया है। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने गुरुवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि उन सिंचाई परियोजनाओं का कार्य रोकने का फैसला किया गया है, जो अब तक 20-25 फीसदी ही पूरा हो सके हैं।
एेसी परियोजनाओं को अब निधि नहीं दी जाएगी और इनका कार्य अनिश्चितकाल के लिए रोका जाएगा। हालांकि उन परियोजनाओं को पूरा करने को वरीयता दी जाएगी, जो 75 फीसदी से अधिक पूर्ण हो चुके हैं। महाजन ने बताया कि एेसी कई सिंचाई परियोजनाएं हैं जिनका काम 25-30 करोड़ रुपए की वजह से लंबित है। सरकार इनको पूरा करने के लिए धन उपलब्ध कराएगी।
खजाने की खस्ताहाली भी है कारण
सतारूढ़ होने के बाद से ही फडणवीस सरकार लगातार सरकारी खजाने की खस्ताहाली की बात कह रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक साथ कई परियोजनाएं शुरू हैं, जिसमें कुछ का कार्य अभी केवल 20-25 फीसदी तक ही हुआ है। जबकि कुछ परियोजनाएं पूर्ण होने के कगार पर हैं।
लेकिन पैसे के अभाव में ये परियोजनाएं भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसलिए जल संसाधन मंत्री ने इन परियोजनाओं का कार्य रोकने का फैसला किया है। जबकि उन परियोजनाओं को धन मिलेगा, जो पूर्ण होने के कगार पर हैं। हालांकि धन के अभाव में ये परियोजनाएं भी लंबित हैं।
इन पर भी लगेगी रोक
महाजन ने बताया कि उन परियोजनाओं का वर्क आर्डर भी रोका जाएगा, जिनकी अभी तक केवल टेंडर केवल ही पूर्ण हो सकी है। एेसी कई परियोजनाए भी हैं जिनके टेंडर प्रक्रिया में देरी की वजह से उनकी लागत में बढ़ोतरी हो गयी है। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के पहले जिस परियोजना की लागत 200 करोड़ रुपए तय की गयी थी। चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से इनका काम आगे नहीं बढ़ सका। फलस्वरूप चुनाव बाद इनकी लागत बढ़कर करीब 300 करोड़ रुपए हो गई। एेसी परियोजनाओं का कार्य शुरू करने पर फिलहाल रोक लगाई जाएगी।