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सिंचाई घोटाला मामले में अजित, तटकरे की होगी जांच, मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी

7 वर्ष पहले
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(आव्हाड के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन करते (बाएं से) माणिकराव ठाकरे, सुनील तटकरे व भाई जगताप।- फोटो)
नागपुर. शिवसेना को सरकार में शामिल करने के साथ ही राज्य की फडणवीस सरकार ने राकांपा के प्रति अपना रुख कड़ा कर लिया है। मुख्यमंत्री देवंद्र फडणवीस ने राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार, छगन भुजबल व प्रदेश राकांपा अध्यक्ष सुनील तटकरे के खिलाफ जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी राज्य सरकार ने सिंचाई घोटाले से संबंधित जनहित याचिका पर अपने शपथपत्र के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को दी है।
राज्य सरकार की ओर से महाअधिवक्ता सुनील मनोहर ने यह शपथपत्र न्यायमूर्ति भूषण गवई और वीएम देशपांडे की संयुक्त पीठ के समक्ष दायर किया है। शपथपत्र में बताया गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सिंचाई घोटाले की जांच को मंजूरी दी है एवं सरकार विदर्भ बैकलॉग को दूर करने तथा अटकी हुई परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। यह खबर सामने आने के बाद विधानभवन में राजनीति गरमा गई । युति सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि एसीबी को जांच की अनुमति देकर मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि हम भ्रष्टाचार के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगे।
वहीं राकांपा नेता शशिकांत शिंदे ने कहा कि एसीबी को जांच के लिए अनुमति देने से हमें कोई परेशानी नहीं है। जांच में सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। उल्लेखनीय है कि विदर्भ में सिंचाई घोटाला होने के आरोप लगाते हुए जनमंच नामक संस्था तथा मोहन कारेमोरे ने अलग-अलग जनहित याचिकाएं उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के समक्ष दायर की है। याचिकाओं में वर्ष 1999 से 2009 की कलावधि में 70 हजार करोड़ रुपए का सिंचाई घोटाला होने की बात कही गई है। कहा गया है कि विदर्भ के सिंचाई प्रकल्पों का निर्माण समय पर नहीं होने के कारण लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचाई से वंचित रह जाने तथा प्रकल्पों के निर्माण की लागत करोड़ों रुपए से बढ़ जाने की बात कहीं गई है।
यह शासन प्रक्रिया का हिस्सा: माणिकराव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने कहा कि मामला अदालत में है। कानून अपना कार्य करेगा। यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस-राकांपा सरकार के दौरान एसीबी को यह अनुमति क्यों नहीं दी गई। इस पर ठाकरे ने कहा कि यह शासन की प्रक्रिया का भाग है। सरकार प्रक्रिया के तहत फैसले लेती है।
सरकार के रुख के मायने:
-सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि साख बचाने के लिए भाजपा राकांपा से मधुर रिश्ते नहीं रखना चाहेगी।
- जनता में यह संदेश जाएगा कि भाजपा चुनाव पूर्व किए गए अपने वादे पर कायम है।
उनकी (भाजपा की) सरकार है। वे जो चाहे कर सकते हैं। -अजित पवार, राकांपा नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री
नाथूराम गोडसे का सम्मान स्वीकार नहीं : मुख्यमंत्री
नाथूराम गोडसे पर उठे विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि गोडसे का सम्मान किसी भी रूप में सरकार स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा, गोडसे हत्यारे हैं, जो भी गोडसे को सम्मानित करेगा, उस पर सरकार ठोस कार्रवाई करेगी। विधानसभा में राकांपा सदस्य जितेंद्र आव्हाड ने पूछा था कि महात्मा गांधी के हत्यारे का जन्मदिन मनाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी।
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