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डाउनलोड करेंनई दिल्ली/मुंबई. महाराष्ट्र में एलबीटी के खिलाफ जारी आंदोलन के मद्देनजर प्रदेश के कांग्रेसी सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है। सांसदों ने उनसे गुहार लगाई है कि इस मामले में वे तत्काल हस्तक्षेप करें और मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को जरूरी निर्देश दें। सांसदों के इस आग्रह पर श्रीमती गांधी ने कहा कि वह इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री से बात करेंगी। गुरुवार को महाराष्ट्र के कांग्रेस के 18 सांसदों का हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन श्रीमती गांधी
को सौंपा गया।
सांसदों ने कांग्रेस अध्यक्ष को बताया कि एलबीटी लागू करने के बाद पूरे प्रदेश में धरने व प्रदर्शनों की बाढ़ आई हुई है और दुकानें लगभग बंद हैं। ऐसे में व्यापारियों के साथ आम लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सांसदों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आंदोलन की वजह से प्रदेश में माहौल कांग्रेस के खिलाफ होता जा रहा है। मुत्तेमवार ने कहा कि एलबीटी वसूलने की पद्धति काफी जटिल है और नगरनिगमों के पास एलबीटी वसूलने के लिए दक्ष स्टॉफ भी नहीं है।
ऐसे में व्यापारियों को एलबीटी के बहाने एक बार फिर इंस्पेक्टर राज आने का डर सता रहा है। सांसदों का कहना था कि वे फिर से चुंगी लगाने के समर्थन में नहीं है, जैसा कि शिवसेना चाहती है। हम चाहते हैं कि व्यापारियों व नगरनिगमों के हक में कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उन्होंने एक स्वर से कहा कि एलबीटी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का सीधा नुकसान कांग्रेस को ही होगा, क्योंकि इससे प्रभावित होने वाला वर्ग कांग्रेस का समर्थन करता है।
मुत्तेमवार ने ताजा हालात का वर्णन करते हुए कहा कि शादी की तैयारी में जुटे नागपुरवासियों को जरूरी सामान खरीदने के लिए हैदराबाद और रायपुर तक जाना पड़ रहा है। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों सांसदों में मुरली देवड़ा, प्रिया दत्त, संजय निरूपम, माणिकराव गाविट, रजनी पाटील, विजय दर्डा, सुरेश टवरे, मारोतराव कोवासे आदि शामिल हैं।
जारी रहेगा आंदोलन
व्यापारियों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र (फाम) ने एलबीटी के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। गुरुवार को आजाद मैदान पर बड़ी संख्या में जुटे व्यापारियों की बैठक में पांच सूत्रीय फैसले लिए गए।फाम ने व्यापारियों से एलबीटी न भरने और इसके लिए रजिस्ट्रेशन न कराने की अपील की है।
फाम के पदाधिकारी मितेश मोदी ने बताया कि बैठक में पांच फैसले लिए गए। जहां एलबीटी लागू हो चुका है, वहां के व्यापारी एलबीटी नहीं भरेंगे और जहां लागू होने वाला है, वहां एलबीटी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगे। वैट का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही अभी जमा करेंगे। बाकी 95 प्रतिशत जुर्माना राशि के साथ बाद में अदा करेंगे। जब तक एलबीटी को लेकर सरकार व्यापारियों की मांग नहीं मानती, तब तक व्यापारिक संगठन अपने किसी कार्यक्रम में किसी मंत्री को नहीं बुलाएंगे। इसके अलावा शुक्रवार और शनिवार को व्यापारी जगह-जगह शिविर आयोजित कर रक्तदान करेंगे।
केवल विरोध जताने :मोदी ने कहा कि वैट तो हमें पूरा भरना ही पड़ेगा। लेकिन सरकार के प्रति विरोध दर्शाने के लिए अभी केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही जमा करेंगे। बाद में जुर्माने के साथ 95 प्रतिशत राशि सरकार को देंगे परंतु अभी पूरी राशि जमा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम इस नारे के साथ रक्तदान करेंगे कि व्यापारी राष्ट्र के लिए रक्तदान कर रहे हैं परंतु सरकार वैट के नाम पर हमारा खून न चूसे।
मिस्डकॉल पर मिलेगा संदेश : मोदी के अनुसार कुछ लोग आंदोलन को कमजोर करने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से अफवाह फैला रहे हैं। इसके लिए फाम की तरफ से एक टेलिफोन क्रमांक जारी किया गया है। इस नंबर पर मिस्डकॉल करने पर फाम की तरफ से आंदोलन को लेकर आधिकारिक संदेश भेजा जाएगा।
समिति गठन का जीआर नहीं हुआ जारी : फाम के महासचिव मुहम्मद अली पटेल ने कहा कि सरकार ने अभी तक अपने वादे के अनुसार एलबीटी को लेकर समिति गठित करने के लिए शासनादेश (जीआर) जारी नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि हम टूटने वाले नहीं हंै। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस-राकांपा में मतभेद
एलबीटी को लेकर राज्य सरकार झुकने को तैयार नहीं ऐसे में कांग्रेस व राकांपा के बीच ही मतभेद पैदा हो गया है। गुरुवार को राकांपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने हल निकालने को कहा है।
राकांपा प्रमुख व्यापारियों के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। राकांपा के प्रदेशाध्यक्ष मधुकर पिचड़ ने भी एलबीटी सहित पांच मसलों पर दोनों दलों के बीच पैदा हुए मतभेद के मद्देनजर तुरंत समन्वय समिति की बैठक बुलाने की मांग की है। दूसरी ओर शिवसेना नेताओं ने राज्यपाल के. शंकरनारायणन से मुलाकात कर एलबीटी रद्द करने की मांग की।
तुरंत निकले हल : पवार
राकांपा अध्यक्ष ने सतारा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मुंबई में व्यापारिक गतिविधियां बंद होना राज्य सहन नहीं कर सकता। इसलिए राज्य सरकार व्यापारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए तत्काल कदम उठाए। हड़ताल का असर धीरे-धीरे मुंबई पर दिखाई देने लगा है। लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
समन्वय समिति की बैठक बुलाने की मांग
इस मामले में प्रदेश राकांपा प्रवक्ता व विधायक नवाब मलिक ने कहा कि आघाड़ी सरकार के सामने आए कुछ मुद्दों पर नीतिगत चर्चा करने के लिए दोनों दलों के समन्वय समिति की बैठक बुलाने की मांग प्रदेश राकांपा अध्यक्ष मधुकरराव पिचड़ ने की है। इसमें एलबीटी भी शामिल है। इसके अलावा मुंबई में म्हाडा के घरों की कीमतें, राज्य में भीषण सूखा, महामंडल में नियुक्ति और जिलास्तरीय समिति के मुद्दे शामिल हैं। बता दें कि दो दिन पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार और प्रदेश राकांपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को पत्र लिखकर एलबीटी के संबंध में मंत्रियों, अधिकारियों व व्यापारियों की समिति गठित करने की मांग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री राकांपा की मांग मानने को तैयार नहीं हैं।
राज्यपाल से मिले शिवसैनिक
शिवसेना विधायक दल के नेता सुभाष देसाई के नेतृत्व में शिवसैनिकों के प्रतिनिधि मंडल ने गुरुवार को राज्यपाल के. शंकरनारायणन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शिवसैनिकों ने राज्यपाल से मांग की कि सरकार को राज्य में एलबीटी को लागू करने से रोंके। व्यापारियों के बंद की वजह से राज्य के लाखों परिवार को रोजमर्रा की जीवनावश्यक चीजें नहीं मिल रही हैं। लिहाजा इस मामले में हस्तक्षेप कर समस्या का हल निकालें।
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