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डाउनलोड करेंमुंबई. एलबीटी को लेकर भाजपा भ्रम पैदा कर रही है। हमें इसका जवाब देना पड़ेगा। जनता के बीच जाकर जनजागृति करनी होगी। यह बात मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने रविवार को सरकारी आवास पर पार्टी नेताओं के साथ हुई बैठक के दौरान कही।
एलबीटी को लेकर कांग्रेस नेताओं में पैदा हुए भम्र को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष जनार्दन चांदुरकर सहित पार्टी के विधायकों व नगरसेवकों की बैठक बुलानी पड़ी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एलबीटी को लेकर सरकार का फैसला बिल्कुल सही है और इस मामले में व्यापारियों की मांग जायज नहीं है। एलबीटी के खिलाफ व्यापारियों की हड़ताल लंबी खिंचने के कारण पार्टी के सांसद- विधायक भी लोगों की नाराजगी को लेकर परेशान हैं।
इसको लेकर पिछले दिनों कांग्रेस के कई सांसदों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की। रविवार को मुख्यमंत्री चव्हाण ने अपने सरकारी आवास पर पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पार्टी पदाधिकारियों को एलबीटी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि एलबीटी कोई नया कर नहीं बल्कि आक्ट्राय का विकल्प है। इससे राज्य सरकार नहीं बल्कि महानगरपालिकाओं को टैक्स मिलेगा। उन्होंने कहा कि व्यापार संगठनों की मांगे सही नहीं है।
व्यापारियों की मांग है कि एलबीटी की बजाय वैट में ही यह टैक्स भी वसूला जाए। पर यह संभव नहीं है। एलबीटी राज्य की 26 महानगरपालिकाओं में लगाया जाना है जबकि वैट पूरे महाराष्ट्र में लगता है।
महानगरपालिकाओं का टैक्स ग्रामीण क्षेत्र से कैसे वसूला जा सकता है। मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष चांदुरकर ने भास्कर से बातचीत में कहा कि एलबीटी को लेकर पार्टी पदाधिकारियों में भी कुछ भ्रम था। मुख्यमंत्री चव्हाण ने उसे बखुबी दूर किया। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बताया कि फेरीवाले एलबीटी से प्रभावित नहीं होगें। सरकार एलबीटी के लिए 5 लाख के टर्नओवर की सीमा निर्धारित करने पर विचार कर रही है।
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