पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंमुंबई. एलबीटी को लेकर व्यापारियों में फूट पड़ती नजर आ रही है। लगातार दुकानें बंद रहने से फुटकर व्यापारी हताश हैं। व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन फाम का मानना है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए दुकानों के शटर पर ताला जरूरी है। व्यापार संगठनों की संयुक्त समिति फेडरेशन आफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र ने बुधवार से फिर से दुकानें बंद रखने की अपील की है जबकि फुटकर व्यापारियों के संगठन फेडरेशन ऑफ रिटेलर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एआरटीडब्लूए) ने खुद को इस बंद से अलग कर लिया है।
एआरटीडब्लूए के अध्यक्ष वीरेन शाह ने कहा कि हमने बुधवार से दुकानें बंद रखने को नहीं कहा है। यदि कुछ दुकानदार दुकानें बंद रखना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एलबीटी के खिलाफ अपना विरोध दर्शाने के लिए हम अगले 6 महीनों तक वैट का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही सरकार के पास जमा करेंगे और एलबीटी के लिए रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराएंगे। फाम के अध्यक्ष मोहन गुरनानी ने कहा कि बुधवार से हमने फिर दुकाने बंद रखने की अपील की है। रिटेल व्यापारियों के कई संगठन हमारे साथ हैं। उन्होंने बताया कि हमने राज्य के मुख्य सचिव जयंत कुमार बांठिया को पत्र लिख कर बताया है कि एलबीटी को लेकर व्यापारियों को किस तरह की कठिनाइयां हैं।
लबीटी के विरोध में मंगलवार को व्यापारी संगठनों ने महामोर्चा निकाला। इस दौरान मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय व्यापारियों ने लिया। मंगलवार सुबह बाजीराव मार्ग से भिड़े पुल तक व्यापारियों ने मोर्चा निकाला। मोर्चे में हजारों व्यापारी तथा उनके परिवार शामिल हुए ।
350 व्यापारियों ने सौंपा लाइसेंस : जिला प्रशासन द्वारा व्यापारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। व्यापारियों पर सीधे कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को 350 व्यापारियों ने खुद जिला प्रशासन को लाइसेंस की फोटो प्रतिलिपि सौंप दी। उनका कहना है कि व्यापार करना है या नहीं यह तय करने का अधिकार हमारा है। हमें एलबीटी नहीं चाहिए। हम उसके लिए पंजीकरण भी नहीं करेंगे। इसलिए लाइसेंस की फोटो प्रतिलिपि खुद होकर जिला प्रशासन को सौंप दी है।
व्यापारियों के बंद के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। नागरिकों ने बंद आंदोलन के बजाय दूसरे किसी तरीके से आंदोलन करने की मांग की है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.