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मुख्यमंत्री का निर्देश नहीं मानते मंत्री, 18 मंत्रियों ने नहीं दी कोई जानकारी

9 वर्ष पहले
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मुंबई. मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की ओर से दो बार निर्देश देने के बावजूद राज्य के 18 मंत्रियों ने अपनी संपत्ति का विवरण राज्य सरकार को नहीं सौंपा है।

राज्य मंत्रिमंडल के कुल 40 सदस्यों में से अभी तक केवल 22 मंत्रियों ने अपनी सपंत्ति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को दी है। यह जानकारी सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के माध्यम से सामने आई है। संपत्ति की जानकारी न देने वालों में नारायण राणे, आरआर पाटील व राजेश टोपे जैसे वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सामान्य प्रशासन विभाग से यह जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में बताया गया है कि अब तक 22 मंत्रियों (इसमें राज्यमंत्री भी शामिल) ने बंद लिफाफे में अपनी संपत्ति का विवरण मुख्यमंत्री को सौंपा है। जबकि मुख्यमंत्री ने अपनी संपत्ति की जानकारी राज्यपाल को सौैंपी है।

संपत्ति की जानकारी देने वाले मंत्रियों में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, स्वास्थ्य मंत्री सुरेश शेट्टी, सार्वजनिक निर्माणमंत्री छगन भुजबल, वनमंत्री पतंगराव कदम, सामाजिक न्यायमंत्री शिवाजीराव मोघे, कृषिमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, स्कूली शिक्षामंत्री राजेंद्र दर्डा, नागरी आपूर्ति मंत्री अनिल देशमुख,

एफडीए मंत्री मनोहर नाईक, जलसंसाधन मंत्री सुनील तटकरे, जलसंसाधन मंत्री (कृष्णाघाटी) रामराजे निंबालकर, दुग्ध विकास मंत्री मधुकर चव्हाण, खेलमंत्री पद्माकर वलवी, महिला व बाल विकास मंत्री वर्षा गायकवाड़, पर्यावरण मंत्री संजय देवतले, स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री फौजिया खान, श्रममंत्री हसन मुश्रीफ, आदिवासी विकास राज्यमंत्री राजेंद्र गावित व उच्च व तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डीपी सावंत शामिल हैं।

इन मंत्रियों ने नहीं दी जानकारी :

अब तक अपनी संपत्ति की जानकारी न देने वाले मंत्रियों में गृहमंत्री आरआर पाटील, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीम खान, उद्योगमंत्री नारायण राणे, राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात, संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन पाटील, मेडिकल शिक्षामंत्री विजय कुमार गावित, रोजगार गारंटी योजना मंत्री नितिन राऊत, गैर पारंपरिक ऊर्जा मंत्री गणेश नाईक, पीडब्लूडी मंत्री जयदत्त क्षीरसागर, उच्च शिक्षामंत्री राजेश टोपे, परिवहन राज्यमंत्री गुलाबराव देवकर,

राज्यमंत्री रणजीत कांबले, भास्कर जाधव, सचिन अहिर, राजेंद्र मुलक, सतेज पाटील व प्रकाश सोलंके शामिल हैं। गलगली का कहना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद 10 दिसंबर-2010 को चव्हाण ने केंद्र सरकार की आचार संहिता का हवाला देते हुए राज्य के सभी मंत्रियों को अपनी संपत्ति की जानकारी देने को कहा था।

पिछले साल भी गलगली ने आरटीआई के तहत यह जानकारी मांगी थी, तब उन्हें बताया गया था कि अभी तक 44 मंत्रियों में 16 मंत्रियों ने अपनी संपत्ति की जानकारी दी है।