पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Misdemeanor, Inflection, Government, Mumbai, Maharashtra

बॉम्बे हाईकोर्ट : दुष्कर्म पीडि़त के प्रति सरकार की संवेदनशीलता क्यों नहीं नजर आती?

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीडि़त महिलाओं को मुआवजा देने को लेकर सरकार के उपेक्षात्मक रवैए के लिए कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि आखिर सरकार की संवेदनशीलता कहां चली गई है। सरकार को ऐसी महिलाओं की चिंता क्यों नहीं है?

सोमवार को यह सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति एसबी सुक्रे की खंडपीठ ने सरकार को फटकारा। फोरम अगेंस्ट ऑप्रेशन ऑफ वुमन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि दुष्कर्म पीडि़त महिला के प्रति सरकार की संवेदनशीलता क्यों नहीं नजर आती? आखिर वह ऐसी कोई व्यवस्था व प्रावधान क्यों नहीं बनाती जिससे ऐसी महिला को तुंरत राहत मिल सके। यह बात कहते हुए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग के सचिव को कोर्ट में हाजिर रहने का निर्देश दिया।

इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील मिहीर देसाई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने काफी समय पहले देश के सभी राज्यों को दुष्कर्म पीडि़त या एसिड हमले की शिकार महिलाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए अलग से निधि की प्रावधान करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद देश के 15 राज्यों ने इस पर अमल किया। लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। इसके साथ ही कोई व्यवस्था भी नहीं बनाई है जिसके जरिए महिलाएं मदद प्राप्त कर सके। एसिड हमलों के मामलों में एफआईआर दर्ज होते ही महिला को कुछ मदद दी जानी चाहिए लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते आर्थिक मदद को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सरकार के पास निधि का अभाव

इस पर सरकारी वकील ने कहा कि सरकार निधी के अभाव के चलते दुष्कर्म पीडि़तों को मुआवजा देने के लिए अलग से निधी का प्रावधान नहीं कर पा रही है। सरकारी वकील के इस जवाब के बाद खंडपीठ ने कहा कि आखिर सरकार की संवेदनशीलता कहां चली गई है। वह दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को लेकर चिंतित क्यों नहीं है। कोर्ट के फैसले को सरकार गंभीरता से क्यों नहीं लेती। खंडपीठ ने फिलहाल इस मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी है और सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग के सचिव को कोर्ट में हाजिर रहने को कहा है।