मुंबई. एक तरफ राज्य की नई सरकार सरकारी खजाने की खस्ताहाली का रोना रो रही है। दूसरी तरफ सरकारी महकमों में फिजूलखर्ची जारी है। बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स (बीकेसी) स्थित एमएमआरडीए के नए कार्यालय भवन के निर्माण पर पिछले सात सालों के दौरान 106 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक इस आईकॉनिक इमारत का निर्माणकार्य पूरा नहीं हो सका है। सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत एमएमआरडीए प्रशासन ने यह जानकारी दी है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन से बीकेसी स्थित एमएमआरडीए मुख्यालय के पीछे निर्माणधीन नई आईकॉनिक इमारत को लेकर जानकारी मांगी थी।
2004 को मिली थी मंजूरी
एमएमआरडीए के कार्यकारी अभियंता और जनसूचना अधिकारी एम वाई पाटील ने गलगली को बताया कि इमारत का काम 24 दिसंबर 2004 को मंजूर किया गया था। तब इसकी मूल रकम 87 करोड़ रुपए थी। 31 दिसंबर 2012 को इस इमारत का कार्य पूरा होना था। 2 बार काम की समय अवधि बढ़ाई गई। निर्माण की अवधि बढऩे के साथ ही इसकी लागत भी बढ़ती गई।
बढ़ते-बढ़ते यह रकम 106 करोड़ तक पहुंच गई है। इस कार्य में हुई देरी के लिए संबंधित ठेकेदार पर एमएमआरडीए ने कोई जुर्माना भी नहीं लगा सका। बिल्डिंग का निर्माण का ठेका मेसर्स रेलकॉन इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दिया गया है जबकि भीतरी डेकोरेशन का काम मेसर्स गोदरेज कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। सात सालों बाद भी 11 मंजिल वाली इस इमारत का निर्माणकार्य पूरा नहीं हो सका।
एमएमआरडीए के पास पहले से मुख्यालय : गलगली का कहना है कि एमएमआरडीए के पास पहले से मुख्यालय है। ऐसे में 106 करोड़ रुपए खर्च कर दूसरा मुख्यालय बनाना फिजूलखर्ची है। ऐसी स्थिति तब है जब राज्य पर लाखों करोड़ों रुपए का कर्ज हैै।