मुंबई. मुंबई विश्वविद्यालय के उपकुलपति राजन वेलुकर की नियुक्ति मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कमेटी से दो सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट मांगी है। उपकुलपति की नियुक्ति को लेकर उठाए गए सवालों की जांच के लिए कोर्ट ने यह निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दायर याचिका में दावा किया गया है कि वेलुकर उपकुलपति के पद पर नियुक्त किए जाने की योग्यता नहीं रखते हैं। सेवानिवृत्ति के कुछ माह पहले हाईकोर्ट के इस आदेश को वेलुकर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और बीपी कोलाबावाला की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने जांच कमेटी को दो हफ्ते के भीतर इस बात की जांच करने को कहा है। इसके अलावा हाईकोर्ट ने राज्यपाल को जांच कमेटी के निष्कर्ष के आधार पर चार हफ्तों में वेलुकर की नियुक्ति पर फैसला लेने को कहा है।
क्या कहा याचिका में
याचिका में दावा किया गया है कि वेलुकर पढ़ाई में अच्छे नहीं थे। एमफिल परीक्षा में उन्होंने सिर्फ 55 फीसदी अंक हासिल किए थे। साथ ही याचिकाकर्ता का कहना है कि वेलुकर की नियुक्ति अस्थाई थी इसलिए वे विश्वविद्यालय के कानून के मुताबिक प्रोफेसर नहीं थे। याचिकाकर्ता के वकील पंकज कोवली ने खंडपीठ को बताया कि उनकी नियुक्ति 1983 में नहीं बल्कि सितंबर 1985 में हुई थी इसलिए भी वे इस पद के लिए जरूरी अनुभव नहीं रखते थे।