(कृपाशंकर सिंह - फाइल फोटो)
मुंबई. मुंबई की राजनीति में उत्तर भारतीय मतदाताओं का अहम योगदान रहा है। फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा में तीन उत्तर भारतीय मुस्लिमों सहित 6 विधायक हैं जबकि विपक्षी दलों भाजपा-शिवसेना के पास एक भी उत्तर भारतीय विधायक नहीं है। इसके बावजूद पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर भारतीयों ने खुलकर भाजपा-शिवसेना युति का साथ दिया था। बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में उत्तर भारतीय राजनीति किस करवट बैठेगी इस पर सभी की नजर है। कांग्रेस से लेकर मनसे तक दर्जन भर उत्तर भारतीय दावेदार अपने-अपने दलों से उम्मीदवारी की आस लगाए बैठे हैं।
मुंबई महानगर की 36 में से करीब 18 सीटों पर उत्तर भारतीय मतदाता चुनाव परिणाम प्रभावित करने की स्थिति में माने जाते हैं। यहां के उत्तर भारतीय मतदाता कांग्रेस के परम्परागत मतदाता माने जाते हैं। लेकिन जब कभी मुंबई के उत्तर भारतीय कांग्रेस का साथ छोड़कर युति के साथ गए कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ। बीते लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते उत्तर भारतीय मतदाताओं ने भाजपा-शिवसेना युति का साथ दिया और मुंबई की सभी 6 सीटों पर युति का कब्जा हो गया।
मनसे भी देगी टिकट
उत्तर भारतीय विरोध की राजनीतिक विचारधारा वाली पार्टी मनसे को भी उत्तर भारतीयों से परहेज रहा। इस विधानसभा चुनाव में मनसे मुंबई से कम से कम एक उत्तर भारतीय को उम्मीदवारी देगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार मनसे कांदिवली से एड. अखिलेश चौबे को अपना उम्मीदवार बनाएगी। चौबे मनसे की स्थापना से ही पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। उत्तर भारतीय बाहुल्य सीट कांदिवली से फिलहाल कांग्रेस के रमेश सिंह ठाकुर विधायक हैं। इसलिए उत्तर भारतीय विधायक को टक्कर देने के लिए मनसे उत्तर भारतीय चेहरा उतारना चहती है।
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