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गठबंधन टूटने के बाद आपस में भिड़ रहे उत्तर भारतीय नेता

7 वर्ष पहले
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मुंबई. कांग्रेस-राकांपा और शिवसेना-भाजपा युति टूटने के बाद बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति में महानगर में उत्तर भारतीय मतदाताओं का महत्व अचानक बढ़ गया है। चुनाव मैदान में शिवसेना, भाजपा, कांग्रेस, राकांपा के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से कई सीटों पर उत्तर भारतीय उम्मीदवार आमने सामने आ गए हैं। जहां पहले कांग्रेस को छोड़ कर भाजपा, राकांपा तथा शिवसेना जैसे दलों से उत्तर भारतीयों को उम्मीदवारी मिलनी मुश्किल दिखाई दे रही थी, पर अब कई नए उत्तर भारतीय चेहरे मैदान में आ गए हैं।
मुंबई की कालिना सीट से कांग्रेस ने मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह को उम्मीदवारी दी है। इस सीट से सिंह के मुकाबले भाजपा ने भी एक दूसरे उत्तर भारतीय अमरजीत सिंह को मैदान में उतारा है। कांग्रेस-राकांपा गठबंधन टूटने के बाद राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को राकांपा ने कालिना से उम्मीदवारी दे दी है। अब यहां तीन उत्तर भारतीय उम्मीदवार आमने-सामने आ गए हैं।
दिंडोशी सीट से कांग्रेस के उत्तर भारतीय विधायक राजहंस सिंह के सामने भाजपा ने मुंबई भाजपा के उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष मोहित कंबोज को उम्मीदवारी दी है। कांग्रेस के दूसरे उत्तर भारतीय विधायक रमेश सिंह ठाकुर की कांदिवली सीट से कांग्रेस ने जहां फिर से रमेश सिंह को उम्मीदवारी दी है, वहीं राकांपा ने अपने उत्तर भारतीय नेता श्रीकांत मिश्र को उनके सामने खड़ा कर दिया है जबकि मनसे ने भी इस सीट से अपने एकमात्र उत्तर भारतीय उम्मीदवार अखिलेश चौबे को टिकट दिया है।
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