पंकजा के सामने खुद को साबित करने की चुनौती
पंकजा ने जिस तरह से ‘संघर्ष यात्रा’ शुरू की उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे खुद को मुख्यमंत्री पद की दावेदार के रूप में पेश करने की कोशिश में है। ध्यान रहे कि उनके पिता गोपीनाथ मुंडे जब जिंदा थे, तब भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के वे सबसे प्रबल दावेदार थे। यही वजह है कि पंकजा के सामने खुद को साबित करने की चुनौती बढ़ गई है।
हालांकि एक मंझे हुए राजनीतिक के रूप में पंकजा ने ‘संघर्ष यात्रा’ के दौरान जिन 79 विधानसभा सीटों से गुजरने का मार्ग तय किया है। उसमें से ज्यादातर विधानसभा सीटें वर्तमान में भाजपा के ही कब्जे में हैं। इसलिए यदि इस चुनाव में भाजपा इन सीटों पर फिर से जीतती है,तो पंकजा श्रेय लेने से पीछे नहीं हटेंगी।
ध्यान रहे कि गोपीनाथ मुंडे के निधन और लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति के चलते पंकजा के चचेरे भाई धनंजय मुंडे फिर से भाजपा में आना चाहते हैं। मगर पंकजा के कड़े विरोध के चलते फिलहाल पार्टी धनंजय के बारे में निर्णय नहीं ले पा रही है।
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