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चुनावी हलचल तेज: पुलिस की नजर होगी सोशल मीडिया पर

7 वर्ष पहले
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मुंबई. चुनावों के ऐलान के बाद नेता और उनके समर्थक प्रचार में जोर-शोर से जुट गए हैं। प्रचार के लिए सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है। कई बार इस माध्यम के दुरूपयोग की बात भी सामने आई है, लेकिन इस बार ऐसा करने वाले मुसीबत में फंस सकते हैं, क्योंकि पुलिस की एक टीम चौबीसों घंटे सोशल मीडिया पर नजर रखे हुए हैं।
पुलिस उपायुक्त धनंजय कुलकर्णी ने बताया कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों से हम वाकिफ हैं, इसलिए इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस लोगों से भी अपील कर रही है कि वे किसी भी आपत्तिजनक सामग्री पर नजर पड़ते ही इसकी सूचना पुलिस को दें। सूचना मिलते ही पुलिस संबंधित कंपनी को कार्रवाई के लिए कहती है और अगले कुछ घंटों में ही विवादित पोस्ट हटा दी जाती है। कुलकर्णी के मुताबिक मुंबई पुलिस सोशल मीडिया लैब और साइबर सेल की टीम के जरिए आपत्तिजनक पोस्ट पर नजर रखे हुए हैं। लगभग छह पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए आपत्तिजनक सामग्री तलाशने और उन्हें हटाने के काम में जुटे रहते हैं। इस साल पुलिस अब तक 451 आपत्तिजनक सामग्रियों को हटवा चुकी है। ये सामग्रियां फेसबुक और दूसरी वेबसाइट के जरिए अपलोड की गईं थीं।
इस साल मई महीने में छत्रपति शिवाजी महाराज और बाल ठाकरे की आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए अपलोड की गईं थीं। इसके बाद पुणे में मोहसिन खान नामक युवक की हत्या कर दी गई थी। साथ ही राज्य के कई इलाकों में तनाव फैल गया था और गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ की गई थी। चुनावों के दौरान अक्सर धार्मिक, जातीय और क्षेत्रीय आधार पर मतदाताओं को बांटने के लिए फर्जी अकाउंट के जरिए भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाई जाती है। महाराष्ट्र समेत देश के कई इलाकों में सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर लोगों की भावनाएं भड़काने के मामले सामने आए हैं।
जेहादी समूह इसका इस्तेमाल युवाओं को बरगलाने के लिए करते हैं जबकि नेता वोट पाने के लिए। इसके चलते पुलिस खासी चौकन्नी है। पुलिस ऐसे नेताओं और उनके समर्थकों पर खास नजर रखेगी जो सामाजिक ध्रुवीकरण के जरिए वोट हासिल करने में लगे रहते हैं।