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अब राज्य की हाउसिंग सोसायटी में भी आरक्षण

9 वर्ष पहले
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मुंबई. राज्य में नया सहकार कानून लागू होने के बाद हाउसिंग सोसायटियों के कार्यकारी मंडल में आरक्षण अनिवार्य हो जाएगा। कानून में कार्यकारी मंडल सदस्यों के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति, ओबीसी तथा विशेष पिछड़े वर्ग के साथ ही महिलाओं के आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।

इसी आधार पर अब आगे सोसायटियों के चुनाव होंगे। इससे पहले सोसायटियों में केवल महिलाओं को आरक्षण था। नए कानून में जाति आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।

केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर सहकारी संस्थाओं में आरक्षण लागू किया है। राज्य में कानून पर अमल होने के बाद सोसायटियों के 21 सदस्यीय कार्यकारी मंडल में अनुसूचित जाति व जनजाति का एक सदस्य, ओबीसी-1, भटक्या विमुक्त जाति-1, वशेष पिछड़े वर्ग का एक और दो महिलाओं की सदस्यता आरक्षित होगी।

सहकार विभाग ने जाति आरक्षण की सूचना व अमल के लिए आदर्श नियमावली तैयार किया है। जो 25 फरवरी को जारी किया जाएगा।

सहकार आयुक्त मधुकर चौधरी के मुताबिक हाउसिंग सोसायटियों को कानून का पालन करना ही होगा। सोसायटियों के चुनाव अब राज्य सहकार चुनाव प्राधिकरण की देखरेख में कराए जाएंगे। साथ ही प्राधिकरण की ओर से पात्र मतदाताओं के नाम निश्चित किए जाएंगे।

यदि चुनाव में पिछड़े वर्ग अथवा महिला नहीं जीत पाई तो कार्यकारी मंडल में उन्हें स्वीकृत सदस्य के रूप में स्थान नहीं दिया जाएगा। कार्यकारी मंडल के सदस्यों की संख्या कम है तो आरक्षण भी उसी आधार पर लागू होगा।