(शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे - फाइल फोटो)
मुंबई. विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर शिवसेना-भाजपा के बीच गतिरोध बना हुआ है। शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ कहा है कि भाजपा को 135 सीटें देना संभव नहीं है। भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने रविवार को साफ संकेत दिए थे कि पार्टी 135 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। इसके बाद उद्धव का यह बयान काफी महत्व रखता है। वैसे, मतभेद दूर करने के लिए रूडी ने मुंबई पहुंचकर उद्धव से मुलाकात की है। उद्धव ने कहा कि शिवसेना का गठबंधन तोड़ने का कोई इरादा नहीं है। सीट बंटवारे पर भाजपा से चर्चा चल रही है। उम्मीद है कि हल निकल जाएगा। हमारे पास भी विकल्प खुला है।
जब तक गठबंधन पर फैसला नहीं होता है तब तक मैं कुछ भी नकारात्मक नहीं बोलूंगा। आगामी दो- तीन दिनों में चर्चा पर विराम लग सकता है। शिवसेना - भाजपा का गठबंधन 25 साल पुराना है। हर बार लगता है, इस पार या उस पार, लेकिन कभी बात उस पार नहीं गई। उद्धव ने कहा कि दोनों पार्टियों का गठबंधन हिंदुत्व के मुद्दे पर हुआ था। हम चाहते हैं कि गठबंधन कायम रहे क्योंकि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गठबंधन को आकार दिया था।
घटक दलों में चिंता
शिवसेना और भाजपा के बीच मचे घमासान से महायुति के घटक दल चिंतित नजर आ रहे हैं। आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने कहा है कि शिवसेना और भाजपा एक साथ चुनाव लड़ें। गठबंधन टूटने के बाद सत्ता भी नहीं मिलेगी। दोनों पार्टियों के कारण महायुति के छोटे दलों को परेशानी हो रही है।
ताकत बढ़ाना चाहती है भाजपा
शिवसेना 2009 के विधानसभा चुनाव में 169 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। और भाजपा 119 पर। शिवसेना ने 44 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने 46 सीटें। इसी आधार पर भाजपा चाहती है कि दोनों पार्टियां 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ें। बाकी 18 सीटें आरपीआई (अाठवले) और राजू शेट्टी के स्वाभिमानी शेतकरी पक्ष जैसे छोटे दलों को दी जाएं।
लोस में मदद की, अब बारी उनकी
उद्धव ने कहा, ‘लोकसभा चुनावों में भाजपा का मिशन 272 था। हमने उनकी पूरी मदद की। लोकसभा की ज्यादा सीटें उन्हें दी। विधानसभा चुनावों के लिए हमारा मिशन 150 है। अब मदद की बारी उनकी है। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।’
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