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दिल्ली के नतीजों के बाद शिवसेना ने की प्रधानमंत्री मोदी को घेरने की शुरुआत

6 वर्ष पहले
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मुंबई. दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजों का असर जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर आएगा। एक तरफ शिवसेना ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की शुरुआत कर दी है, तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा की भीतरी कलह तेज होने के आसार हैं। राज्य भाजपा के कई दिग्गज नेता भी मानते हैं कि पार्टी आलाकमान के दबंग व तानाशाही रवैये की वजह से दिल्ली में पार्टी की दुर्गति हुई। सशक्त आलाकमान के कारण ही महाराष्ट्र की चुनावी रणनीति में गलतियां हुई। मोदी के आर्शीवाद से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सर्वेसर्वा बन गए।
इसके बावजूद विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को सबसे बड़े दल के रूप में चुनकर दे दिया। पर मोदी का धुआंधार अभियान भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं दिला सका। दरअसल महाराष्ट्र के नतीजों से ही भाजपा आलाकमान को सबक सीखना था लेकिन शिवसेना को लेकर जानबूझकर आक्रामक व अपमानजनक रवैया अपनाया गया।

विधायकों की राय से नेता चुनने की हुई थी अपील : महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं ने चुनाव नतीजों के बाद आलाकमान से विनती की थी कि वे पार्टी के विधायकों से राय लेकर नेता चुनें। लेकिन दिल्ली वालों ने किसी की बात नहीं सुनी। शाह व मोदी के इशारे पर देवेंद्र फडणवीस क ो भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। इससे एकनाथ खड़से से लेकर नितीन गडकरी तक ज्यादातर विधायक नाराज हो गए।
आज भी तमाम नेताओं व विधायकों में नेतृत्व के मुद्दे पर नाराजगी है। हालत यह है कि पार्टी के ज्यादातर मंत्री भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली से नाखुश हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को लगता है कि आलाकमान के बूते पर ही फडणवीस उनकी बात को अहमियत नहीं देते।

मुखेड़ विस चुनाव पर नजर
पार्टी विधायकों की नजर इस महीने होनेवाले नांदेड़ जिले के मुखेड़ विधानसभा चुनाव पर है। अगर इसमें भाजपा को विजय नहीं मिली तो विधायक भी अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं।