मुंबई. केंद्र व राज्य सरकार की विविध योजना तथा ताडोबा व्याघ्र प्रतिष्ठïान के माध्यम से ताडोला-अंधारी व्याघ्र प्रोजेक्ट के कोर क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्त्रोतों (पोखर) के पुनर्जीवन का काम नियमित किए जाने की जानकारी वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि कोर क्षेत्र में पुराने जल स्त्रोतों के मजबूतीकरण और नये स्त्रोत तैयार करने के लिए 2014-15 में 16 गड्ढ़ों का काम व 12 नई कूपनलिकाओं की खुदाई और उस पर सोलर पंप लगाना प्रस्तावित है। ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रोजेक्ट में वन्यप्राणियों के लिए पर्याप्त पानी व चारा उपलब्ध है।
इसलिए पानी व चारा के अभाव में वन्यजीवों का जंगल से बाहर जाने की बात सही नहीं है। अनेक वन्यजीव प्रकल्प क्षेत्र से बाहर भ्रमण करते हैं और वह उनके जीवन की प्राकृतिक शैली है। इस दौरान वन्यजीवों के कारण समीप के क्षेत्रों में फसल नुकसान, पशुधन व मानव पर हमले के कारण जख्मी व मृत होने की घटना हो सकती है। इस संघर्ष को टालने के लिए उपाय योजना की जाती है। जल स्त्रोत व्यवस्थापन, निर्मिती सहित वन्यप्राणी अधिवास के विकास संबंधी काम किए जाते हैं। उसमें वन तालाब, पत्थर की बांध बनाना तथा विशेष स्थानों पर बोअरवेल लगाना व टैंकर द्वारा गर्मी में जलापूर्ति करने का समावेश है।
बाघ, तेंदूआ व अन्य वन्यप्राणियों को बस्तियों में आने से रोकने के लिए कर्मचारियों के अलग-अलग समूह तैयार कर ग्राम विकास समिति की मदद से नियमित गश्त कर पटाखे फोड़ कर वन्यप्राणियों को जंगल में भगाने का प्रयास किया जाता है। जंगली पशुओं के हमले में जन, पशु व फसल नुकसान की भरपाई की रकम समय पर अदा की जा रही है। कैमरा ट्र्रैप लगाकर बाघ, तेंदुआ की हलचल की जानकारी ली जाती है। उनके अस्तित्व वाले क्षेत्र में पर्यटक व स्थानीय लोगों की भीड़ कम करने की दृष्टिï से अस्थाई नाके बनाकर क्षेत्र प्रतिबंधित किया गया है। सदस्य बंटी भांगडिया, डा. देवराव होली, कृष्णा गजबे ने श्री मुनगंटीवार से जवाब मांगा।