( त्रयम्बकेश्वर मंदिर )
मुंबई। 27 दिसंबर को वर्ल्ड टूरिज्म डे मनाया जाता है। इस मौके पर dainikbhaskar।com आपके लिए पर्यटन स्थलों की खास जानकारी आपके सामने ला रहा है। आज हम आपको भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग त्रयम्बकेश्वर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर एक ही जगह पर ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों ही लिंग के रूप में विराजमान हैं। नासिक शहर से तीस किलोमीटर दूर इस मंदिर को त्रयम्बक ज्योतिर्लिंग, त्र्यम्बकेश्वर शिव मन्दिर भी कहते है। यहाँ पास में ही ब्रह्मगिरि पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिसकी जलधारा से इनका अभिषेक होता है।
ऋषि गौतम और गोदावरी नदी ने की थी शिव से प्रार्थना
गोदावरी के उद्गम स्थल के पास ही श्री त्रयम्बकेश्वर शिव स्थापित हैं। लिंग रूप में स्थित भगवान् शिव ऋषि गौतम और पवित्र नदी गोदावरी की प्रार्थना पर यहां रुकने को तैयार हुए थे। । यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग का प्रत्यक्ष दर्शन स्त्रियों के लिए मना है, इसलिए स्त्रियां केवल भगवान के मुकुट का दर्शन करती हैं।
त्रिदेव का है यहां पर वास
इस मंदिर के भीतर एक गड्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। गोदावरी की जलधारा इन त्रिमूर्तियों पर लगातार पड़ती रहती है। इस मंदिर के पास ही स्थित ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिए सात सौ सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है। ऊपरी पहाड़ी पर ‘रामकुण्ड’ और ‘लक्ष्मणकुण्ड’ नामक दो कुण्ड भी स्थित हैं। पर्वत की चोटी पर पहुँचने पर गोमुखी से निकलती हुई गौतमी यानी गोदावरी नदी का दर्शन प्राप्त होता है।
गंगा के बराबर है गोदावरी नदी का महत्व
उत्तर भारत में बहने वाली गंगा नदी की तरह ही दक्षिण में बहने वाली पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है। जहाँ उत्तरभारत की गंगा को ‘भागीरथी’ कहा जाता हैं, वहीं इस गोदावरी नदी को ‘गौतमी गंगा’ कहकर पुकारा जाता है। भागीरथी राजा भागीरथ की तपस्या का परिणाम है, तो वहीँ गोदावरी ऋषि गौतम की तपस्या का साक्षात फल है। त्रयम्बकेश्वर के पास से निकली गोदावरी नदी दक्षिण भारत में बहते हुए बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।
महाकुंभ का होता है आयोजन
देश में लगने वाले विश्व के प्रसिद्ध चार महाकुम्भ मेलों में से एक महाकुंभ का मेला यहीं लगता है। यहां हर बारहवें साल में महाकुम्भ पर्व का स्नान, मेला आदि धार्मिक कार्यक्रमों का समारोह होता है। उन दिनों गोदावरी में स्नान गंगा में स्नान के बराबर माना गया है ।
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