भ्रष्टाचार के मामले में 199 को रंगे हाथ पकड़ा फिर भी 159 सबूतों के अभाव में बरी हो गए

5 वर्ष पहले
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नागपुर. सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने वाली एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) खुद सवालों के घेरे में है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पिछले चार सालों में 199 मामलों में भ्रष्टाचार करते हुए रंगे हाथ जिन आरोपियों को पकड़ा, उनमें से 159 आरोपी सबूतों के अभाव में बच गए। केवल 40 मामलों में ही कोर्ट के सामने पुख्ता सबूत पेश हो पाए। 
 
अब सवाल यह है कि एसीबी जिन आरोपियों को पकड़ती है, कार्रवाई के पहले कई स्तर पर उसकी जांच की जाती है। सबूतों के साथ रंगे हाथ पकड़ने के लिए पूरा जाल बिछाया जाता है, ऐसे में सबूतों के अभाव में उनका छूट जाना आश्चर्य की बात है। 
 
पुख्ता सबूत नहीं, 80% बरी
 
चार सालों में 199 मामलों में से 159 मामलों में कोर्ट ने माना कि एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ जो सबूत दिए वह पुख्ता नहीं थे। छोटी-छाेटी कमियों के कारण वे बरी हो गए। एसीबी के सूत्रों के अनुसार, कुछ ऐसे मामले भी थे जिन्हें कोर्ट ने भी माना कि उनके खिलाफ कार्रवाई के पहले सबूत होना लाजिमी था, जिसे पेश नहीं किया जा सका। कुछ सबूत पेश हुए भी तो मामलों को सिद्ध करने के लिए काफी नहीं थे। यही कारण है कि केवल 40 मामलों में भी आरोप सिद्ध हो पाए।
 
ये रहे असफलता के सामान्य कारण
 
जानकारों की मानें तो रिश्वतखोरों के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाली न्यायालयीन प्रक्रिया उनके निर्दोष बरी होने का सबसे बड़ा कारण है।  आरोप-पत्र दाखिल करने के बाद शिकायतकर्ता का अदालत में दर्ज बयान और बचाव पक्ष के वकील द्वारा क्रॉस एक्जीमिनेशन के बीच काफी लंबा अंतर रहता है। इसमें बचाव पक्ष के वकील द्वारा शिकायतकर्ता से एक ही सवाल को घूमा-फिरा कर पूछा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान जवाब में थोड़ा भी अंतर आने पर बचाव पक्ष को इसका फायदा मिल जाता है।
 
शिकायतकर्ता जिस काम के लिए आरोपी के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत करता है, वह काम आरोपी के पास अटका नहीं रहने पर शिकायत निराधार मानी जाती है। सभी सरकारी गवाह को एक साथ कोर्ट में बुलाया जाता है, परंतु कामकाज का अधिक बोझ रहने से एक ही दिन सभी गवाह के बयान दर्ज नहीं हो पाते। जो बाकी रह जाते हैं, उन्हें पुन: दूसरी तारीख पर बुलाया जाता है। उनकी भी अपनी व्यस्तता रहती है। उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर काटने से मानसिक तनाव बढ़ता है और न्यायायलीन प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। इन कारणों का आरोपियों को निर्दोष बरी होने में लाभ मिलता है।
 
 
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