नागपुर. जंगल में आग लगने की भनक तब तक नहीं लगती जब तक वह व्यापक रूप ना ले ले। लेकिन ऐसी स्थितियों से निबटने के लिए वन विभाग ने एक जनवरी से सेटेलाइट के जरिए रिमोट सेंसिंग प्रणाली का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
जंगल के किसी भी कोने में आग की घटना को सेटेलाइट भांप लेगा और जिस जगह ये आग लगी है उस स्थान के संबंधित बिट गार्ड के मोबाइल पर आग की सूचनावाला एसएमएस भेज देगा।
रिमोट सेंसिंग प्रणाली के तहत ऐसे अब तक 201 एसएमएस विभिन्न बिट गार्ड को भेजे जा चुके हैं। करार के तहत चार भारत के सेटेलाइट और दो संयुक्त राष्ट्र के सेटेलाइट का इस प्रणाली में उपयोग किया जाएगा।
एक सेटेलाइट को भारत के भूभाग का फेरा लगाने के लिए तकरीबन 15 मिनट का समय लगता है। विभाग को दिन में 10.30 व 2.30 बजे व रात में 10.30 व 2.30 बजे इमेज भेजी जाती है।
मौसम साफ रहने पर यह जंगल के चप्पे-चप्पे पर नजर रख पाता है। इस प्रणाली के आधार पर जंगल में आग बुझाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके कई फायदे सामने आ रहे हैं।
वन व वन्यजीवों के लिए वरदान साबित होगी प्रणाली
बता दें कि इस प्रणाली का उपयोग देश के चुनिंदा राज्य ही कर रहे हैं। इसमें महाराष्ट्र के अलावा हिमाचल, कर्नाटक, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इन राज्यों में विशेष तौर से बड़े पैमाने पर सघन वनों का क्षेत्र व्यापक है। ऐसे में ये प्रणाली वन व वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वरदान साबित हो रही है।
गौरतलब है कि जंगल में आगजनी की घटना की रोकथाम के लिए फरवरी माह में फायर लाइनिंग की संपूर्ण तैयारी की रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। फिलहाल इसका काम शुरू है। इसकी भी स्थिति जल्द ही स्पष्ट हो जाएगी।