अकोला. भाजपा-शिवसेना के बीच विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच अकोला पूर्व विधानसभा क्षेत्र को भी शिवसेना से लेकर भाजपा को सौंपने की गतिविधियां तेज होने की चर्चा है, क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार शिवसेना प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि विधान परिषद सदस्य गोपीकिसन बाजोरिया को शिवसेना चुनाव लड़वाएगी, लेेकिन भाजपा का दावा है कि यहां से लगातार तीन बार शिवसेना हारी है। इसलिए चौथी बार यहां भाजपा को टिकट दिया जाना चाहिए।
1999 के चुनाव में शिवसेना के विजय मालोकार पराजित हुए थे जबकि 2004 में जिला प्रमुख श्रीरंग पिंजरकर चुनाव हारे और 2009 में पूर्व राज्यमंत्री गुलाबराव गावंडे की पराजय हुई। इसलिए भाजपा का दावा मजबूत लग रहा है। सूत्रों की मानें तो लगभग 12 स्थानों पर भाजपा शिवसेना की दावेदारी खारिज कर अपनी दावेदारी करने जा रही है जिसमें अकोला पूर्व भी शामिल है। ऐसा हुआ तो भाजपा की ओर से रणधीर सावरकर प्रत्याशी हो सकते हंै। अकोला पूर्व भाजपा के पास गया, तो अन्य चार विधानसभा क्षेत्रों में से 1 क्षेत्र भाजपा को शिवसेना के लिए छोडऩा पड़ेगा जो वह कतई छोड़ नहीं सकती।
ऐसे में दोनों के बीच सीट को लेकर मतभेद उभर सकते हैं। इस बार भी अकोला पूर्व से तीसरी बार भारिप बमसं के हरिदास भदे को टिकट देना तय है। पिछले दो चुनाव से वे यहां जीतते आ रहे हैं। राजनीतिक दलों में भारिप बमसं ही इकलौता दल है जिसने अपने प्रत्याशी पहले ही तय कर दिए है जिसके अंतर्गत बालापुर विधानसभा के लिए वर्तमान विधायक बलीराम सिरस्कार जबकि अकोला पश्चिम के लिए डा. रहमान खान के नाम पार्टी प्रमुख एड. प्रकाश आंबेडकर ने पहले ही घोषित कर दिए हैं।