नागपुर. विदर्भ में भाजपा अपनी बढ़ती ताकत का दावा करते हुए शिवसेना से 7 से अधिक सीटें मांग रही है। शिवसेना के कोटे की गोंदिया, वर्धा, वणी, वरोरा जैसी करीब दर्जन भर सीटों पर भाजपा ने दावा ठोंका है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बदली हुई राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए भाजपा ने अधिक सीटों की मांग की है। आरक्षित सीटों पर भी सीट अदला-बदली का प्रयास किया जा रहा है। चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को जल्दी पूरा करना पड़ेगा। ऐसे में सीट बंटवारे का मामला भी जल्द सुलझने का दावा किया जा रहा है।
भाजपा में उत्साह
विदर्भ में विधानसभा की 62 सीटें हैं। 2009 के चुनाव में भाजपा ने 39 सीटों पर लड़कर 19 सीटें जीती थी। शिवसेना ने 27 सीटें लड़ी, पर 8 ही जीत पाई। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का उत्साह बढ़ा है। विधानसभा क्षेत्र स्तर पर मतदान का आंकड़ा देखा जाए, तो 62 में से 58 सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली। जिन 4 सीटों पर भाजपा पिछड़ी उनमें मेलघाट, तिरोड़ा, पुसद व उमरखेड़ शामिल हैं।
मूर्तिजापुर, दर्यापुर, मेहकर सीटों पर बढ़ा प्रभाव
अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर भी मिली बढ़त ने भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ाया है। अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में मेहकर, वाशिम, मूर्तिजापुर, दर्यापुर, उमरेड, उत्तर नागपुर, भंडारा, अर्जुनीमोर, चंद्रपुर व उमरखेड़ का समावेश है। मेहकर, दर्यापुर व भंडारा से शिवसेना लड़ती है। पिछले चुनाव में इन आरक्षित सीटों में से 7 सीटें भाजपा-सेना ने जीती थी। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित 7 सीटों में मेलघाट, आमगांव, आरमोरी, गड़चिरोली, अहेरी, रालेगांव, आर्णी शामिल हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में युति को कहीं भी सफलता नहीं मिली। मेलघाट में भाजपा के राजकुमार पटले 710 मतों के अंतर से हारे थे। गड़चिरोली में अशोक नेते 960 मतों से हार गए। अब स्थिति बदली है। गड़चिरोली से विस चुनाव हारे श्री नेते अब लोकसभा सदस्य चुने गए हैं।
यहां भाजपा नहीं जीती
विदर्भ में लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक बढ़त जिन सीटों पर मिली, उनमें गड़चिरोली जिले की अहेरी सीट शामिल है। अहेरी से लोकसभा उम्मीदवार को 69 हजार मतों की बढ़त मिली। विदर्भ में भाजपा की बढ़त का यह प्रथमांक है। 65 हजार की बढ़त के साथ पूर्व नागपुर दूसरे स्थान पर है। आर्णी में भले ही 59 हजार से अधिक मतों की बढ़त मिली। विदर्भ की देवली, अहेरी, मोर्शी सीट पर भाजपा कभी जीत नहीं पाई। राजुरा, भद्रावती, वर्धा, काटोल, सिंदखेड राजा, पुसद में शिवसेना सफल नहीं हो पाई। लिहाजा भाजपा ने क्षेत्रवार चुनावी स्थिति का ब्यौरा रखते हुए कुछ सीटों पर अदला-बदली की पेशकश की है।
आरपीआई (आठवले) की स्थिति कमजोर
रामदास आठवले ने आरपीआई के लिए कम से कम 5 से अधिक सीटों की पेशकश युति से की है, लेकिन पिछले चुनाव के परिणाम को देखते हुए भाजपा किसी भी सीट पर आरपीआई को मौका देने की स्थिति में नहीं है। पिछले चुनाव में विदर्भ में आठवले की आरपीआई ने 23 सीटें लड़ी थी। उनमें से काटोल में 23 हजार व पश्चिम नागपुर में 21 हजार मत मिले। हिंगणा व भंडारा में भी आरपीआई को मिले मत का आंकड़ा 5 हजार से पार हुआ। शेष सीटों पर 5 हजार भी मत नहीं मिले।