पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Building Work Will Become Costly In Nagpur

महंगा होगा इमारतों का निर्माणकार्य, नागपुर में आ रही है मप्र से रेत

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नागपुर. महंगाई से जूझ रही जनता के लिए एक और झटका है। शहर में मकानों का निर्माणकार्य और महंगा हो सकता है। वजह, मध्य प्रदेश सरकार ने रेत की कीमतें नियंत्रण मुक्त करने का निर्णय लिया है। इससे रेत की कीमतें तय करने का अधिकार पूरी तरह रेत माफियाओं को मिल जाएगा। फिलहाल नागपुर जिले के रेत घाट पर रोक लगी है। नागपुर में मध्यप्रदेश से रेत आ रही है। इसका असर नागपुर पर भी होने के आसार जताए जा रहे हैं।
मसौदा तैयार
मध्य प्रदेश खनिज विकास निगम ने इसका मसौदा तैयार किया है। इसे इसी सप्ताह मंजूरी मिल सकती है। सरकारी नियंत्रण हटने से सीधे तौर पर रेत कारोबारियों को फायदा मिलेगा और वे मनमर्जी से दरें तय कर सकेंगे। मसौदे में रेत की दरों को डी-कंट्रोल करने के पीछे तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार ने गौण खनिजों के लिए माइनिंग प्लान लागू किया है। इस प्लान के हिसाब से रेत खनन अब मात्रा के आधार पर होगा। ऐसी स्थिति में ठेकेदार खदान से प्रति घनमीटर रेत उठाने की दर खुद तय करेगा। अभी निगम दर तय करता है।
नागपुर पहुंचते-पहुंचते और भी महंगी
नागपुर से जुड़े एक रेत कारोबारी ने बताया कि नागपुर जिले की सभी रेत घाट पर रोक लगी है। जिन रेत घाटों पर खुदाई शुरू है, वह पूरी तरह अवैध है। ऐसे में नागपुर के कारोबारी मध्यप्रदेश की रेत घाट पर नजर रखे हैं। हाल में नागपुर के एक कारोबारी ने बालाघाट के एक रेत घाट को 1.95 करोड़ रुपए में खरीदा है। पिछले वर्ष तक यह 10 लाख रुपए में बिकता था। फिलहाल मप्र में 350 फीट रेत की गाड़ी 14 हजार रुपए में बिक रही है यानी 40 रुपए क्यूबिक फीट।
अगर सरकारी नियंत्रण हटता है तो यही रेत 18 से 20 हजार में मिलेगी। नागपुर में पहुंचते-पहुंचते यह और भी महंगी होगी। फिलहाल नागपुर के रेत कारोबारियों के लिए मध्यप्रदेश के घाट पसंदीदा स्थल हैं। नागपुर में रेत माफियाओं में रक्तरंजित खेल शुरू होने के कारण स्थानीय ठेकेदार मध्यप्रदेश में घाट खरीदना पसंद कर रहे हंै ताकि व्यापार सुकून से कर सकें।