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बस स्टैंड बन रहे आफत, स्टैंड से निकलती बसें मुख्य मार्ग पर कर रहीं ट्राफिक जाम

8 वर्ष पहले
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नागपुर. शहर के मुख्य मार्ग पर बने बस स्टैंड लोगों के लिए मुसीबत का कारण साबित हो रहे हैं। बस स्टैंड से निकलनेवाली बसें तेज तपिश में मार्ग पर जाम लगा देती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। तेज धूप से बचने के लिए कई बार वाहनधारक जल्दबाजी भी करते हैं, जो किसी अनहोनी का कारण बन सकती है। गणोश टेकड़ी के पास बना एम.पी बस स्टैंड मार्ग का अड़ंगा बना हुआ है।

रेलवे स्टेशन से लोहापुल चौक की ओर जानेवाले एक दिशा मार्ग पर बना यह बस स्टैंड व गणोशपेठ बस स्टैंड हर रोज मार्ग से गुजरनेवालों के लिए आफत बन जाते हैं। दैनिक भास्कर की ओर से शनिवार को कुछ देर मार्ग पर खड़े रहकर इन बस स्टैंड से निकलनेवाली बसों से राहगीरों की परेशानी का जायजा लिया गया। इस दौरान परेशानी के साथ वाहनधारकों व राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ती देखी गयी।

बस व वाहनों के बीच आंखमिचौली का खेल : दोपहर 3 बजे एमपी बस स्टैंड से गड़चिरोली की ओर जाने के लिए एक बस निकलने की तैयारी में थी। बस के कंडक्टर ने बस स्टैंड के सामनेवाले रास्ते पर खड़े होकर मार्ग से गुजरते वाहनों को रोकने का इशारा किया। मिनटों तक वाहनधारक सड़क पर रुक गए। चिलचिलाती गर्मी में वाहनधारक बेहाल हो रहे थे। बस कछुए की गति से आधे मार्ग पर आकर फिर वापस बस स्टैंड के भीतर दाखिल हो गई।

इस बीच चार-पांच वाहनधारक बस के आगे से निकल गए। बस फिर आगे आई और इस बार मार्ग पर खड़े कुछ दुपहिया वाहनधारक बस के पीछे से निकल गए। हड़बड़ाहट में चालक कभी इधर तो कभी उधर देखता। यह खेल मिनटों तक चला। रोजाना स्टैंड से निकलनेवाली बसों व मार्ग से गुजरनेवाले वाहनों के बीच आंखमिचौली का खेल चलता रहता है। लेकिन यह खेल कभी-भी जानलेवा साबित हो सकता है।

रांग साइड वाहन बनाते हैं जाम को विकराल : करीब 4 बजे एक बस का चालक यात्रियों से भरकर बस को स्टैंड से बाहर निकालने की कोशिश करता है। लेकिन पहले से ही मार्ग पर एक बस रास्ता घेरे खड़ी थी। बस स्टैंड से निकलनेवाली बस आधे से ज्यादा रास्ते पर आकर खड़ी हो गई। पहले से खड़ी बस ने भी आधा मार्ग घेर कर रखा था। परिणामस्वरूप पूरा मार्ग बंद हो गया। ऐसे में मार्ग से गुजरनेवाले वाहनधारकों को जगह नहीं मिल रही थी।

रांग साइड से आनेवाले ऑटोचालक व रिक्शा ट्राफिक जाम को और भी बढ़ा रहे थे। लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए कोई नहीं था। कभी वाहनचालक बस चालकों को सुनाते तो कभी बस चालक दूसरे बस चालक के नाम पर गाली निकाल रहा था। यह नजारा काफी देर तक देखा गया।

कोई भी आ सकता है बस की चपेट में : गणोशपेठ बस स्टैण्ड से निकलनेवाली बसें तो मानो यमराज बनकर स्टैंड से बाहर निकलती हैं। शाम 4:45 बजे उमरेड जानेवाली बस, बस स्टैंड के मुख्य द्वार से निकल रही थी। सामने ही बेतरतीब ऑटो खड़े रहने से बस को और आगे होकर मुड़ना पड़ा जिससे बस पूरी तरह मार्ग पर आ गई। गणोशपेठ बस स्टैंड चौक से बैद्यनाथ चौक की ओर जानेवाले वाहनधारक मार्ग पर ही रुक गए। अगल-बगल में वाहन रहने से बस संभलकर आगे बढ़ रही थी।

इस बीच एक वाहनचालक बस व रास्ता द्विभाजक के बीच मिली जगह से निकलने की कोशिश में जुट गया। अचानक बस की रफ्तार बढ़ी इस भांपते ही वाहनधारक ने जमकर आवाज करते हुए ब्रेक लगाई। कुछ पल की सूझबूझ से बस के पहले वाहन रुका और जिंदगी बच गई।

अतिक्रमण बन रहा जान का दुश्मन : बस के प्रवेश व निकासी द्वार पर अतिक्रमणकारियों ने पैर पसार रखे हैं। ऐसे में बसों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है। शाम 5:30 बजे एक एसटी बस बाहर से स्टैंड के भीतर प्रवेश कर रही थी। अचानक एक हाथ ठेलावाला उसके सामने आ गया। बस मार्ग पर ही रुक गई। मार्ग से गुजरते वाहनधारक बस व ठेले के बीच से मिल रही जगह से गुजरते चले गए। ठेला बस के सामने से पूरी तरह से निकलने के बाद बस ने बस स्टैंड के भीतर प्रवेश किया।