नागपुर. जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए जहां सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं सरकारी नुमाइंदों को इससे कुछ खास वास्ता नहीं। कुछ को विभागीय क्षेत्राधिकार रोकता है तो कुछ अन्य मनगढंत पाबंदियां। शायद वे भूल जाते हैं कि लोग नियमों के दायरे में आते हैं, परिस्थितियां नहीं और यही कारण है कि लापरवाही व अमानवीयता की सारी हदें वे पार कर रहे हैं।
ऐसी ही संवेदनहीनता उस समय देखने को मिली जब प्रसव पीड़ा से सड़क पर कराह रही एक महिला के पास से पुलिस की जीप गुजरी। दर्द से छटपटा रही महिला गुहार लगाती रही, लेकिन जीप आगे निकल गई। और तो और जच्चा-बच्चा सुरक्षा योजना पर अमल करने वाला मेडिकल की भी लापरवाही सामने आई। सूचना देने पर भी कोई सुध लेने नहीं पहुंचा।
जाटतरोडी सड़क पर ही शनिवार शाम एक महिला की प्रसूति हुई। बस्ती की महिलाओं ने प्रसूति कराई। न डॉक्टर, न न र्स। केवल भीड़ व शोरगुल तथा दर्द से कराहती महिला। वहां से उसी समय गुजर रही पुलिस जीप में सवार पुलिस वालों ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि माजरा क्या है? दैनिक भास्कर का संवाददाता उसी दौरान वहां से गुजर रहा था। वह ठहर गया। पता चला कि अस्पताल जा रही एक महिला की सड़क किनारे ही डिलीवरी हो गई।
होश में आने के बाद देखती रही बेटे को अपलक
किसी महिला की जिंदगी में मां बनना सबसे बड़ा खुशी वाला पल होता है। शनिवार को सहिस्ता सलीम खान नामक महिला की जिंदगी में वहीं क्षण आया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही जाटतरोडी नंबर 3 इंदिरानगर मार्ग पर पैदल जाते समय वह अचानक बैठ गई। उसे दर्द से कराहते देख कुछ बुजुर्ग महिलाएं समझ गईं कि वह गर्भवती है। बच्चे के पैदाइश का समय आ गया है। बुजुर्ग महिलाएं समय गंवाए बिना चारों ओर ओट कर खड़ी हो गईं। कुछ लोगों ने महिलाओं को एंबुलेंस बुलाने के लिए कहा लेकिन सहिस्ता के पास इतना वक्त नहीं था। वह नवजात शिशु को जन्म देकर बेहोश हो गई। यह देख प्रसूति करा रही महिलाएं घबरा गईं। एक वृद्ध महिला ने ढांढस बांधते हुए कहा कि कुछ महिलाओं के साथ प्रसूति के समय ऐसा होता है। कुछ समय पश्चात सहिस्ता को होश आया। वह अपने बेटे को अपलक निहारती रही।
एक वह भी था पुलिसवाला
गत 7 सिंतबर की बात है। इसी तरह एक महिला सुनसान सड़क पर भरी बरसात में प्रसव-वेदना से छटपटा रही थी। पुलिस अधिकारी पुंडलिक मेश्राम गश्त पर थे। वाहन चालक के सावधान करने के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ चुकी जीप को पीछे ले जाने के लिए कहा। दर्द से कराहती गर्भवती को अपने उसी वाहन से डागा अस्पताल तक लेकर आए। महिला ने सुंदर बच्चे को जन्म दिया। परिजन आज भी उन्हें दुआएं देते नहीं थकते।
पति दौड़ा रिक्शा लाने
पति सलीम खान रिक्शा लाने गया था। आने के बाद उसे पता चला कि बेटा हुआ है। खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। उसकी मां ने नाती को गोद में उठाया तथा मददगार महिलाओं का आभार मानते हुए खुशी-खुशी घर की ओर निकली। कुछ लोगों ने मेडिकल अस्पताल को सूचना दी लेकिन कोई नर्स या डॉक्टर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे। कुछ महिलाओं के साहस से महिला व बच्चे की जान बच गई। समाचार लिखे जाने तक महिला को उसका पति अस्पताल लेकर पहुंच चुका था।