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डाउनलोड करेंनागपुर. कुल राजस्व का 65 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को देनेवाला बिक्रीकर विभाग फिलहाल सांसत में पड़ गया है। राज्य की सभी योजना, परियोजना व विधायक कार्यों को अमलीजामा पहनाने की कोशिश इसी विभाग के दम पर होती है। एलबीटी के विरोध में व्यापारियों के बेमियादी हड़ताल पर जाने से मई माह का राजस्व प्रभावित होने की चिंता विभाग को अभी से सता रही है।
बिक्रीकर विभाग के नागपुर विभागीय कार्यालय ने 2011-12 में 3084 करोड़ का राजस्व राज्य की तिजोरी में जमा किया था। 2012-13 में यह राजस्व बढ़कर 3120.75 करोड़ हुआ था। इस वर्ष (2013-14) 3440.96 करोड़ का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य है। अप्रैल तक सब ठीक-ठाक चला, लेकिन मई से बिक्रीकर विभाग के राजस्व पर आफत आने की आशंका नजर आ रही है। नागपुर विभाग ने अप्रैल 2012 में 361.13 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया था, जो अप्रैल 2013 में बढ़कर 409 करोड़ रुपए हुआ।
नागपुर विभाग को मई 2012 में 223.50 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसमें नागपुर जिले की हिस्सेदारी 139.57 करोड़ की थी। मई 2013 का टारगेट 256.72 करोड़ का है और इसमें नागपुर जिले को 161 करोड़ का टारगेट पूरा करना है।
नागपुर विभाग के तहत नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गड़चिरोली, भंडारा व गोंदिया जिले आते हैं। विभाग में राजस्व प्राप्ति में नागपुर अव्वल है। नागपुर के साथ ही चंद्रपुर में भी एलबीटी का विरोध हो रहा है। नागपुर का कारोबार तो दो सप्ताह से बुरी तरह प्रभावित है। चंद्रपुर का कारोबार भी कुछ हद तक प्रभावित हो रहा है। आंदोलन इसी तरह लंबा चला तो बिक्री कर विभाग की कमर टूट सकती है। इसका सीधा असर राज्य की तिजोरी पर पड़ेगा।
अप्रैल में सबसे ज्यादा राजस्व
बिक्री कर विभाग को नागपुर सहित राज्य भर में अप्रैल माह में सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है। इसका कारण यह है कि कारोबारी मासिक, त्रैमासिक व अर्ध वार्षिक विवरण पत्र व कर जमा करने का काम अप्रैल में करते हैं। इस माह को ड्यू मंथ भी माना जाता है।
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