नागपुर. नागपुर विवि ने स्नातकोत्तर में डेजर्टेशन (लघु शोध प्रबंध) को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए डेजर्टेशन को रखने के लिए नागपुर विवि के पास जगह उपलब्ध नहीं है। विवि के नाम पर विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कॉपी महाविद्यालय में ही रखी रह जाती है, इससे विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
महाविद्यालय में पड़ी रहती हैं कॉपियां
प्राप्त जानकारी अनुसार स्नातकोत्तर में विद्यार्थियों के लिए डेजर्टेशन अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक विद्यार्थी को डेजर्टेशन की तीन से पांच प्रतियां बनानी पड़ती हैं। इसमें एक से दो राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में देनी होती हैं, एक महाविद्यालय में रहती है और एक विद्यार्थी के पास रहती है, एक मार्गदर्शक को देनी होती है। पहले नागपुर विवि के लिए बनाई जानेवाली कॉपियां महाविद्यालय में ही रखी रह जाती हैं। इसकी वजह डेजर्टेशन रखने के लिए विवि के पास जगह उपलब्ध नहीं होना है।
अतिरिक्त खर्च
विद्यार्थियों ने बताया कि पूरा डेजरटेशन बनाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को पांच से छह हजार रुपए का खर्च आता है। डेजरटेशन की एक कॉपी बनाने के लिए करीब डेढ़ से दो हजार रुपए खर्च होता है। यदि विवि को प्रदान की जानेवाली डेजरटेशन की कॉपी बनाने से विद्यार्थी को मुक्ति मिल जाए, तो विद्यार्थियों पर आर्थिक भार कम हो सकता है। डेजरटेशन एक तरह से लघु शोध प्रबंध होता है। विद्यार्थियों में शोध वृत्ति बढ़े और शोध को प्राधानता मिले इस लिहाज से इसे स्नातकोत्तर में अनिवार्य किया गया है।