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सूखे पर टूटा गतिरोध, दो दिन के हंगामे के बाद विपक्ष की मांग मंजूर

7 वर्ष पहले
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(विधानसभा सत्र के दौरान राकांपा नेता मीडिया से बात करते हुए)
नागपुर. विधानमंडल में सूखे पर पैकेज की मांग को लेकर दाे दिन तक जारी गतिरोध थम गया है। बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा हुई। विपक्ष ने अधिक से अधिक राहत पैकेज जल्द घोषित करने की मांग की, वहीं सरकार की ओर से किसानों को राहत में कमी नहीं करने का आश्वासन दिया गया।
विधान सभा में कांग्रेस व राकांपा के सदस्यों के निवेदन पर विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने प्रश्नोत्तर रोक कर सूखे पर चर्चा की अनुमति दी। भाजपा सदस्य चैनसुख संचेती ने नियम 292 के तहत कृषि संकट पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। वहीं विधान परिषद में भी कार्यवाही की शुरुआत इसी चर्चा से हुई, जो दिनभर चलती रही।
विप में हंगामे के बीच हुई चर्चा

विधान परिषद में भी सूखे की स्थिति पर दिनभर चर्चा चली। लेकिन इस दाैरान दाे बार हंगामा हुआ। कांग्रेस के माणिकराव ठाकरे ने नियम 260 के तहत सूखे पर चर्चा आरंभ की। राकांपा के धनंजय मुंडे व भाजपा सदस्य शोभाताई फडणवीस ने प्रमुखता से विचार रखे। सदस्यों का कहना था कि किसानों को राहत पैकेज जल्द दिया जाए। प्रति एकड़ मुआवजे की भी मांग की गई।
… और कर्ज पर यह सुझाव-आैर लिया जा सकता है
राज्य पर कर्ज के मसले पर भी विपक्ष सरकार पर जमकर बरसा। राकांपा के अजित पवार व छगन भुजबल ने राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के बयान को राज्य के लिए निराशाजनक मानते हुए कहा है कि संकट में फंसे किसानों के बीच यह संदेश जाना ठीक नहीं है कि सरकार की तिजोरी खाली है। पवार ने कहा, ‘कर्ज उसी को मिलता है, जिसकी चुकाने की क्षमता है। अमेरिका भी विकास कार्यों के लिए कर्ज लेता है।’
सकल घरेेलू उत्पाद का 25 प्रतिशत कर्ज लिया जा सकता है। राज्य सरकार ने अब तक जीडीपी का 18 प्रतिशत ही कर्ज लिया है। पवार ने कहा कि सरकार किसानों के लिए नए कर्ज भी ले, तो कुछ गलत नहीं होगा। भुजबल ने कहा राज्य की स्थिति खराब नहीं है। अब भी आर्थिक स्थिति अच्छी है। सरकार किसानों को अधिक से अधिक मदद दे।
फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते सर्वाधिक आत्महत्या : पवार
राकांपा नेता अजित पवार ने विधान सभा में चर्चा के दौरान किसानों के लिए राहत पैकेज घोषित करने की मांग की। साथ ही कहा कि देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते एक माह में जितनी आत्महत्या हुई, उतनी पहले किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में नहीं हुई। उन्हांेने कहा कि विदर्भ व मराठवाड़ा में सबसे अधिक किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विदर्भ के हैं। विदर्भ की स्थिति को देखते हुए उन्हें जल्द राहत पैकेज घोषित करना चाहिए।
ये मांगें भी रखीं पवार ने
आत्महत्याग्रस्त किसान परिवारांे को एक-एक लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि दी जाए।
पीड़ित परिवार के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले और किसानों की विधवाओं के लिए पेंशन की व्यवस्था करे।
राज्य में दूध से महंगा पानी है। बिसलरी पानी की बोतल 20 रुपए में मिलती है। जबकि एक लीटर दूध का भाव 17 रुपए है। पहले दूध 27 रुपए लीटर था। लिहाजा राज्य सरकार दूध पर चार रुपए का अनुदान दे।
विधान सभा में ये आरोप-प्रत्यारोप भी
आघाड़ी सरकार की गलती का पाप भुगत रहे किसान : संचेती
विधान सभा में भाजपा सदस्य संचेती ने कहा कि राज्य में किसानों को सरकार की ओर से राहत की आवश्यकता है। पर पूर्ववर्ती आघाड़ी सरकार पर भी निशाना साधा। कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की गलती का पाप किसान भुगत रहे हैं। संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री ने राज्य को कृषि पैकेज दिए, लेकिन राज्य सरकार खर्च का उचित नियोजन नहीं कर पाई। आघाड़ी सरकार के विचार शून्य नियोजन के कारण राज्य को आर्थिक नुकसान हुआ। किसानों के लिए मंजूर की गई राशि भी आघाड़ी सरकार खर्च नहीं कर पाई।
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