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शत-प्रतिशत बंद रहीं दवा दुकानें

8 वर्ष पहले
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नागपुर। शुक्रवार को शहर के साथ ही जिलेभर की 3200 दवाई दुकानों ने अखिल भारतीय दवाई संगठन के आह्वान पर अपना व्यवसाय पूर्णत: बंद रखा। बंद का आयोजन दवाओं पर दी जानेवाली मार्जिन को कम करने, रिटेल में एफडीआई ना आये व सरकार द्वारा केमिस्टो के साथ किए जा रहे अन्यायपूर्वक व्यवहार के विरोध में किया गया था।

नागपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव गिरीश भट्टड ने बताया कि नागपुर शहर में बंद पूरी तरह से सफल रहा। नागपुर शहर के अलावा कामठी, उमरेड, काटोल, नरखेड़, सावनेर, रामटेक, कलमेश्वर अबादि स्थानों कि सभी दवा दुकानें बंद रही।

बंद के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, हेल्थ और फैमिली वेलफेअर मिनीस्टर गुलाबनबी आजाद व केमिकल व फर्टीलाइजर मंत्री श्रीकांतकुमार जेना, नागपुर में अतिरिक्त सह-आयुक्त अशोक गिरी तथा जिलाधिकारी आशा पठान को ज्ञापन सौंपा गया।

इस बीच मरीजों को असुविधा न हो इसलिए आपातकालिन दवाईयों की व्यवस्था गांधीबाग दवा बाजार मे की गयी थी। आपातकालीन दवा बिक्री व्यवस्था का कार्यभार मुरली केवलरमानी, राजेन्द्र कावड़कर, चंद्रकुमार गंगवानी, विनोद गोमासे, किशोर वोरा, अभिजीत हुद्दार, दत्ता खाड़े, श्याम परतानी, कन्हैयालाल मोटवानी, सुनीत माहेश्वरी, नंदु कन्हेर, किशोर तलहा तथा नवीन भांगे ने विशेष सहयोग दिया।

पारडी भी रहा शत प्रतिशत बंद : दवा व्यापारियों की हड़ताल के चलते पूर्व नागपुर स्थित पारडी परिसर के सभी दवा दुकानदारों ने दुकानें बंद रखी। बंद को सफल बनाने कैलाश लालवानी, ललीत डडूरे, विक्रांत झाडे, अनीस खान, अजय शेंडे आदि का विशेष सहयोग रहा।