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घरेलू उद्योग बड़े बाजार के लिए हो जाएं तैयार, अनिवार्य होगा इनसे माल खरीदना

मूल्य का कम से कम 20 प्रतिशत इन उद्योगों से प्राप्त करना अनिवार्य किया जाएगा।

Dainik Bhaskar

Mar 18, 2015, 01:50 AM IST
घरेलू उद्योग बड़े बाजार के लिए हो जाएं तैयार
नागपुर। दम तोड़ रहे कुटीर, लघु व मध्यम उद्योगों के लिए यह वर्ष निर्णायक साबित हो सकता है। केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपने उत्पादों या सेवाओं के वार्षिक मूल्य का कम से कम 20 प्रतिशत इन उद्योगों से प्राप्त करना अनिवार्य किया जाएगा।

अपने-अपने नजरिये से विदर्भ
विदर्भ के पिछड़े उद्योगों के लिए इस नियम को नए परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। इस नियम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ लोगों ने इसे पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा में मुकाबला करने के लिए सहायक बताया तो कई लोगों का मानना है कि इस नियम का लाभ तब तक नहीं मिल सकता, जब तक उद्योगों के पनपने के लिए सरकार उचित माहौल नहीं बनाती।

मनवाना होगा लोहा
स्थानीय छोटे उद्योगों को इस नियम के तहत मिलने वाले मौके को भुनाने और माल आपूर्ति की क्षमता का लोहा मनवाना होगा। सार्वजनिक तथा सरकार के मंत्रालयों को वार्षिक खरीदी, जिसमें उत्पादन से लेकर सेवा तक का समावेश है, उसे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों से सेवा लेना अनिवार्य होगा। न्यूनतम 20 प्रतिशत में से 4 प्रतिशत सेवा अनुसूचित जाति व जनजाति के उद्योगों से लेना अनिवार्य है। इससे पिछड़ी जाति के उद्योगपतियों को भी लाभ मिलेगा।

358 वस्तुएं शामिल
इस नियम के तहत 358 वस्तुओं और सेवाओं को कुटीर, लघु व मध्यम उद्योगों से लेना अनिवार्य होगा। इसमें अचार, टूथ पिक स्टिक, तकिया, आचार से लेकर अन्य तरह की सामग्रियों का समावेश है। माना जा रहा है कि इस नियम के चलते न केवल छोटे उद्योगों को आने वाले समय में बड़ा बाजार उपलब्ध होगा, बल्कि इससे रोजगार की समस्या भी खत्म हो जाएगी। नियम के तहत 20 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा होने के बाद भी सूची में दिए गए 358 सामग्रियों को इन उद्योगों से लेना अनिवार्य होगा।

मिसाइल तथा हथियार निर्माताओं को छूट
इतना ही नहीं, इस नियम में आने वाली दिक्कतों के लिए शिकायत निवारण यंत्रणा भी विकसित की गई है। इस नियम में रक्षा के कुछ क्षेत्रों को छूट मिलेगी, जिसमें मिसाइल तथा हथियार निर्माताओं को इससे बाहर रखा गया है। एमएसएमई कार्यालय से प्राप्त जानकारी में पता चला कि सार्वजनिक क्षेत्र की 146 कंपनियों में से केवल 32 कंपनियों ने ही इस कोटे को पूरा किया है। अनिवार्य होने के बाद बड़े पैमाने पर इसका लाभ मिलेगा।

पंजीकृत होना अनिवार्य
जनवरी 2015 तक विदर्भ में एमएसएमई में 33 हजार 530 पंजीकृत कंपनियां हैं। इससे प्रतिस्पर्धी मूल्य उत्पादन मिलेगा, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि इस नियम का लाभ लेने के लिए कंपनियों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। फिलहाल एमएसएमई की ओर से उद्योजकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एकसाथ लाने के लिए सम्मेलनों का दौर जारी है।
उद्योग बीमार हैं, इससे फर्क नहीं पड़ेगा
हमारे 50 प्रतिशत उद्योग बीमार हैं। इस आरक्षण से उन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जब तक नियमों में शिथिलता नहीं लाई जाएगी, तब तक कुछ नहीं होगा। बैंक 3 माह ब्याज न देने वाली कंपनियों की सेवाएं बंद कर देती है, जिससे कंपनी वाले अपने खाते से लेन-देन नहीं कर पाते। स्टैंप ड्यूटी वैल्यूएशन 6 हजार रुपए हो गया है, जिससे उद्योगों को लाभ नहीं मिल पाया है।
- हेमंत अंबासेलकर, पूर्व अध्यक्ष,
बूटीबोरी मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
यह एक स्वागत योग्य नियम है। हमारे गैर स्पर्धी क्षेत्र में तेजी देखने मिलेगी। पड़ोसी राज्यों में ईंधन, बिजली आदि सस्ते दर पर उपलब्ध होने से हमारे उद्योग स्पर्धा में पिछड़ रहे थे। उन्हें इस नियम का लाभ मिलेगा। उद्योगों को गुणवत्ता व संख्या बढ़ानी होगी।
-दीपेन अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष,
नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स
घरेलू बाजार का मार्ग खुलेगा
यह नियम अनिवार्य किए जाने से घरेलू बाजार का मार्ग खुलेगा। घरेलू उद्योगों को भी मांग की आपूर्ति के लिए सक्षम बनना होगा। इस नियम में घरेलू उद्योगों को गुणवत्ता, समय और दाम तीनों का सही तालमेल रखना होगा।
- पी.एम. पार्लेवार,
निदेशक. एमएसएमई

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