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शीतसत्र के पहले दिन विकलांगों ने तोड़े बैरिकेड्स, कांग्रेस के मोर्चे की निकली हवा

7 वर्ष पहले
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नागपुर. शीतसत्र के पहले दिन सोमवार को लगभग आधा दर्जन संगठनों ने विधान भवन पर दस्तक दी। विदर्भ विकलंाग समिति का मोर्चा सत्र की समाप्ति तक रहने वाला है। समिति के आंदोलनकारी अपनी परंपरागत शैली में बैरिकेड्स तोड़ कर आवाज बुलंद करनी चाही। कांग्रेस के मोर्चे ने नेताओं की हवा निकाल दी। अन्य संगठनों ने भी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया, जिससे पुलिस को भी ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।
मोर्चे में नहीं आए लोग
दोपहर करीब दो बजे कांग्रेस पार्टी का मोर्चा टी-प्वाइंट पर पहुंचा। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मानिकराव ठाकरे, विधायक अमर काले, पूर्व मंत्री नितिन राऊत, राजेंद्र मुलक, अमित देशमुख, अनिल अहमद, यशोमति ठाकुर आदि ने मोर्चे को संबंधित किया। वर्धा जिले के आर्वी से निकली विधायक अमर काले की दिंडी मोर्चा का विलय दीक्षाभूमि से कांग्रेस के मोर्चे मे विलय हुआ। उसके बाद संयुक्त रूप से मोर्चा टी-प्वाइंट पर पहुंचा। जहां पर उक्त नेताओं ने मोर्चे को संबोधित किया।
उस दौरान विधायक अमर काले का निलंबन रद्द करने, मराठवाड़ा और विदर्भ को सूखा घोषित करने, किसानों के लिए विशेष पैकेज, कपास, सोयाबीन,धान और गन्ना उत्पादकों को उचित समर्थन मूल्य देने, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को उचित मुआवजा देने आदि मांगें की गई हैं। मांगे पूरी नहीं होने पर प्रदेशाध्यक्ष ठाकरे ने गांवबंदी आंदोलन चलाने की सरकार को चेतावनी दी है। मोर्चे में बड़ी संख्या में जनसमुदाय उमडऩे की संभावना व्यक्त की गई थी, परंतु दो-ढाई हजार ही लोग होने से कांग्रेस की हवा निकल गई।
विकलांगों का ठीया मोर्चा
विदर्भ विकलांग संघर्ष समिति का ठीया आंदोलन शुरू हो चुका है। खान-पान व अन्य सामग्री लेकर वे धरना स्थल पर पहुंचे। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिए हैं। गिरिधर भजभुजे के नेतृत्व में मोर्चा निकाला गया। मोर्चे में शामिल प्रदर्शनकारियों ने सत्र के पहले ही दिन विविध मांगों को लेकर अपनी आवाज सरकार के कानों तक पहुंचाने के लिए बैरिकेट्स को वाहनों से टक्कर मारकर तोडऩे का प्रयास किया। महिलाओं का भी आक्रामक रवैया रहा। कुछ लोग परिवार के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी लेकर मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने सरकार के सामने कुल 30 मांगें रखी हैं।
जिसमें से मुख्यत: उद्योग के लिए 200 और निवास के लिए 1500 वर्ग फीट जगह उपलब्ध कराने, सरकारी व गैरसरकारी क्षेत्र में विशेषतौर पर विकलांग व्यक्ति के लिए प्रतिस्पर्धा परीक्षा समाप्त करने, सरकारी समिमियों व महामंडलों में पूर्व, पश्चिम ऐसे क्षेत्रों के अनुसार विकलांगों को समिति में लेने की मांगें रखी गईं। समिति ने पिछले वर्ष 13 दिनों तक आंदोलन किया था। इस बार भी जब तक शत्र चलेगा, तब तक मोर्चे पर डटे रहेंगे।
शहर विकास मंच नागपुर
तीव्र घोषणाओं के साथ शहर विकास मंच का मोर्चा टेकड़ी रोड पर पहुंचा, जिसमें विशेषतौर पर महिलाओं की खासी उपस्थिति रही। तीव्र घोषणाओं के साथ उन्होंने शहर के सभी झोपड़पट्टीवासियों को जमीन के पट्टे देने, पट्टों के लिए सहकारी गृहनिर्माण सोसायटी और फोटो पास की शर्त रद्द करने, रेलवे लाइन के समीप बस्ती झोपड़पट्टी पुनर्वसन करने, रमाई आवास योजना को तत्काल लागू करने आदि मांगे सरकार के सामने रखी गई हैं। इस बीच राज्य मंत्री रंजीत पाटील ने मोर्चे का ज्ञापन स्वीकार किया और उनकी मांगे सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।