नागपुर. उत्तर नागपुर में विधानसभा का चुनाव इस बार काफी रोचक हो सकता है। रोगायो मंत्री डॉ. नितीन राऊत कांग्रेस उम्मीदवार होंगे। उन्हें चुनौती देने के लिए बसपा ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी किशोर गजभिये को उम्मीदवार बनाया है। विधान परिषद की नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट के चुनाव में काफी मत लेकर राजनीतिक पकड़ की पहचान छोड़ चुके गजभिये इस चुनाव में भी निर्णायक भूमिका में हो सकते हैं। भाजपा उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। भाजपा में टिकट दावेदार तो काफी हैं, लेकिन ऐसे कार्यकर्ता की अभी भी तलाश है, जो दलित मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा के लिए प्रभावित कर सकें। रिपा के अन्य गुटों ने एकजुटता के प्रयास आरंभ किए हैं। एकीकृत रिपा का उम्मीदवार भी यहां प्रभावकारी भूमिका में रह सकता है।
आरक्षित है सीट : अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित उत्तर नागपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय तक रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जीतते रहे हैं। भाजपा को भी एक बार जीत मिली। गैर बौद्धिस्ट दलित प्रतिनिधि के रूप में भाजपा के भोला बढेल यहां से चुनाव जीते थे। 1999 से कांग्रेस के डॉ. नितीन राऊत लगातार चुनाव जीत रहे हैं। डॉ. राऊत उत्तर नागपुर ही नहीं महाराष्ट्र की राजनीति में दलित समाज से कांग्रेस के सक्षम प्रतिनिधि के रूप में पहचान बना चुके हैं। लेकिन राऊत पर यह भी आरोप लगते रहते हैं कि वे केवल सत्ता की राजनीति करते हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए अपेक्षानुरूप कार्य नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें चुनौती देने में भाजपा सफल नहीं रही है।
रह गए कार्यकर्ता बनकर
1999 के चुनाव में भाजपा के नाना शामकुले काफी मतों के अंतर से हार गए। शामकुले अब चंद्रपुर के विधायक हैं। 2004 में भी शामकुले को हार मिली। उस वर्ष बसपा का प्रभाव बढऩे लगा था। बसपा ने कांग्रेस के महापौर रहे राजेश तांबे को राऊत के विरोध में उतारा। तांबे 40 हजार के करीब मत लेने में सफल रहे। राऊत की जीत कायम रही। 2009 के चुनाव में भाजपा ने तांबे पर दांव लगाया। भाजपा के टिकट पर भी तांबे, राऊत के सामने नहीं टिक नहीं पाए। बसपा के धरम पाटील डमी उम्मीदवार साबित हुए थे। चुनाव के पहले व बाद में वे राऊत समर्थक कार्यकर्ता बनकर रहे।
स्नातकों को जोडऩे की मुहिम
फिलहाल उत्तर में बसपा के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है। बसपा के मनपा में 12 में से 8 नगरसेवक उत्तर नागपुर में हैं। कार्यकर्ताओं की शिकायत रहती है कि चुनाव में पसंद का उम्मीदवार नहीं मिल पाता है। इस बार शिकायत दूर करने का दावा किया जा रहा है। किशोर गजभिये महाराष्ट्र के समाज कल्याण सचिव रहे हैं। भंडारा के जिलाधिकारी से लेकर मुंबई मनपा के अतिरिक्त आयुक्त भी रहे हैं। वे बसपा के सहायक संगठन बामसेफ के लिए मध्यप्रदेश में काम कर चुके हैं। विप चुनाव के लिए गजभिये ने स्नातकों को जोडऩे की विशेष मुहिम छेड़ी थी।
पड़ोसी हैं गजभिये, राऊत: किशोर गजभिये व नितीन राऊत पड़ोसी हैं। बेझनबाग में राऊत के घर के पास ही गजभिये का घर है। समाज कल्याण सचित व मंत्री के नाते गजभिये व राऊत मंत्रालय में कई बार मिलते रहे हैं।
रिपा नेता पर भाजपा का दांव
कहा जा रहा है कि इस बार भाजपा एक रिपा नेता पर दांव लगाने जा रही है। नगरसेवक रहे रिपा नेता को पार्टी में प्रवेश दिलाकर उम्मीदवार बनाया जा सकता है। यह नेता भी विधानसभा चुनाव लड़ चुका है। पिछले चुनाव में काफी मत लिये। अन्य 50 से अधिक दावेदारों में से कई दावेदारों ने अलग संगठन के लिए काम शुरू कर दिया है। धर्मपाल मेश्राम, संदीप गवई, बबली मेश्राम, अशोक मेंंढे, वनीता तिरपुडे ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।