औरंगाबाद. ऊपरी बांधों से जायकवाड़ी जलाशय(पैठण) में 7.89 टीएमसी पानी छोड़ने से संबंधित गोदावरी विकास महामंडल के कार्यकारी संचालक द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाने से उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने इनकार कर दिया है। इससे संबंधित दायर याचिका मुंबई हस्तांतरित करने का आदेश न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति एएम बदर की पीठ ने दिया है।
गाैरतलब है कि रविवार से ऊपरी बांधों से जायकवाड़ी में पानी छोड़ने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। किसान गोवनाथ काशीनाथ नार्वे और बालासाहेब जगन्नाथ दले, निवासी, अहमदनगर ने औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर कर जायकवाड़ी में ऊपरी बांधों से पानी छोड़ने से संबंधित गोदावरी विकास महामंडल द्वारा दिए गए आदेश पर अंतरिम आदेश देकर रोक लगाने मांग की थी। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने किसी प्रकार का स्थगन आदेश देने से मना किया। खंडपीठ ने जायकवाड़ी के पानी से संबंधित सभी याचिकाएं मुंबई में होने के कारण उक्त याचिका भी मुंबई को हस्तांतरित करने का आदेश दिया।
महाराष्ट्र जलसंपत्ति नियमन प्राधिकरण ने आदेश दिया था कि ऊपरी बांधों से जायकवाड़ी में उसके अधिकार का पानी छोड़ा जाए। इस पर कार्रवाई करते हुए गोदावरी विकास महामंडल के कार्यकारी संचालक ने पांच दिसंबर 2014 को आदेश दिया था कि ऊपरी बांध(नाशिक, अहमदनगर) से जायकवाड़ी में 7.89 टीएमसी पानी छोड़ें।
क्या कहता है आदेश
आदेश के मुताबिक मूला के सामूहिक जलाशय से 3.59 टीएमसी तो प्रवरा समूह(भंडारदरा, निलवंडे, आढला, भोजपुर) से 4.30 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया था।