मुंबई. एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी और पार्टी नेता सुप्रिया सुले महाराष्ट्र महिला आयोग की सदस्य आशा मिर्जे के बचाव में उतर आई हैं।
शारीरिक शोषण के लिए महिलाओं के पहनावा और व्यवहार को जिम्मेदार ठहराने वाले मिर्जे के बयान का बचाव करते हुए सुप्रिया ने कहा, 'मिर्जे उस तरह से बात रही थी जैसे एक ग्रांडमदरकरती, इस तरह की सलाह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।' सुप्रिया ने कहा कि मिर्जे गैंगरेप पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए काम करती रही हैं। वह अपने इस बयान के लिए माफी भी मांग चुकी हैं।
दरअसल, महाराष्ट्र महिला आयोग की और एनसीपी की सदस्य आशा मिर्जे ने
महिलाओं पर विवादित बयान दिया था। नागपुर में एनसीपी की महिला कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में आशा ने कहा था कि महिलाओं के साथ होने वाले
शारीरिक शोषण के लिए उनका पहनावा और व्यवहार जिम्मेदार होता है। उन्होंने दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए गैंगरेप के लिए भी पीड़िता को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि क्या दामिनी वास्तव में रात को 11 बजे अपने दोस्त के साथ फिल्म देखने गई थी? यही नहीं आशा ने मुंबई की शक्ति मिल कैंपस में युवा पत्रकार के साथ हुए गैंगरेप मामले में भी पीड़िता को घेरा। उन्होंने कहा कि पीड़िता शाम 6 बजे शक्ति मिल जैसी सुनसान जगह पर क्यों गई थी? उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए लिए हमें सचेत रहने की जरूरत है। कहीं जाने से पहले हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम कहां जा रहे हैं, किसके साथ जा रहे हैं, क्यों जा रहे हैं, क्या उस जगह जाना जरूरी है।
मिर्जे ने ये बातें एनसीपी की उस महिला इकाई के सम्मेलन में कही थी, जिसका नेतृत्व पार्टी प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले करती हैं।
आशा के बयान की आलोचना
आशा विवादास्पद बयान देकर चौतरफा घिरती दिखाई दे रही हें।
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने आशा के इस बयान को महिलाओं का अपमान और कानून का मजाक बनाना बताया है। वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने भी आशा के बयान की निंदा की है। भाजपा ने भी आशा के बयान को बेतुका बताया है। भाजपा ने आशा के इस बयान की तुलना दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के उस बयान से की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को रात में घर ने नहीं निकलना चाहिए।
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