नागपुर. सूखा पीड़ित किसानों की मदद के लिए राहत पैकेज की घोषणा की मांग पर विपक्ष अड़ा रहा। हंगामे के बीच कामकाज प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, पर विपक्ष नहीं माना। लिहाजा दोपहर में ही विधान सभा व विधान परिषद की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा में सभा की शुरुआत में ही कांग्रेस व राकांपा के सदस्यों ने हंगामा किया।
प्रश्नोत्तर को रोककर सरकार की ओर से राहत पैकेज घोषित करने की मांग की गई। राकांपा की ओर से शशिकांत शिंदे ने सभी विषयों को रोककर सूखे की स्थिति पर स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने का निवेदन विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े से किया। अध्यक्ष ने निवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कार्य सूची के अनुरूप प्रश्नोत्तर व अन्य विषयों के बाद सूखे पर चर्चा होगी।
राकांपा सदस्य दिलीप वलसे पाटील ने कहा कि किसानों के मामले में पहले भी सरकार अन्य विषयों को रोककर विपक्ष को उत्तर देती रही है। विपक्ष की मांग पर राजस्वमंत्री एकनाथ खडसे ने कहा कि सरकार भी सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार ने राहत पैकेज निर्धारित किया है। विपक्ष के सुझाव मिलने पर पैकेज में अतिरिक्त निधि का प्रावधान किया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस के गट नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि पैकेज घोषित करने के बाद ही चर्चा का कोई औचित्य है। पैकेज से सरकार की स्थिति साफ होगी। उसपर विपक्ष अपनी बात रखेगा।
हंगामे के बीच पटल पर रखे विधेयक
विधानसभा में हंगामे के बीच सरकार ने 4 विधेयक सदन पटल पर रखे। इनमें महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन व नगर रचना सुधार विधेयक 2014, महाराष्ट्र सहकारी संस्था सुधार विधेयक 2014, महाराष्ट्र विद्यापीठ सुधार विधेयक 2014 और महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता सुधार विधेयक शामिल हैं।
यूं बरपा हंगामा
विधान सभा : पहले तीन बार, फिर दिन भर के लिए स्थगित
हंगामे को देखते हुए आरंभ में सभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में आधे-आधे घंटे के लिए दो बार कार्यवाही स्थगित की गई। दोपहर 1.20 बजे दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई। पैकेज की मांग को लेकर कांग्रेस व राकांपा के सदस्यों ने वेल में पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। बाद में वेल में ही बैठकर सरकार का विरोध किया गया।
विधान परिषद : 2:30 घंटे में 6 बार स्थगित
सुबह 11 बजे शुरू हुई विधान परिषद की कार्यवाही हंगामे के कारण 1.35 बजे दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले ढाई घंटे के दौरान सदन की कार्यवाही को 6 बार स्थगित करना पड़ा। सुबह 11 बजे कार्यवाही आरंभ हुई। सभापति शिवाजीराव देशमुख के आसन पर बैठते ही कांग्रेस-राकांपा ने एकजुट होकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। किसानों को न्याय देने की मांग को लेकर दोनों ने नारेबाजी की। किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग की गई। सभी सदस्य वेल में पहुंच गए। कुछ सदस्यों ने विषय पत्रिका फाड़कर भी अपना विरोध जताया। विपक्ष ने सत्तापक्ष को एक शब्द भी बोलने का मौका नहीं दिया।
सूखे के बहाने पवार ने शिवसेना पर साधा निशाना: पैकेज को लेकर राकांपा नेता अजित पवार ने शिवसेना पर यह कहकर निशाना साधा कि उसने अपनी बात रखने का मौका खो दिया। राज्य में सूखे की स्थिति है। सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए शिवसेना के विधायकों ने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया है।
सूखे की स्थिति पर शिवसेना ने अध्ययन किया है। सूखा पैकेज पर शिवसेना अपनी बात प्रमुखता के साथ रख सकती थी।
2000 करोड़ रुपए का पैकेज देने की तैयारी में सरकार
सूखे व अन्य कृषि संकट की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार किसानों के लिए 2000 करोड़ का राहत पैकेज घोषित करने की तैयारी कर रही है। परिवहन मंत्री रावते ने इसकी पुष्टि की है। पूरक मांगों के तहत यह पैकेज तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री इस पैकेज में अतिरिक्त निधि देने की घोषणा भी कर सकते है। मंगलवार को विपक्ष के हंगामें को अनुचित ठहराते हुए रावते ने कहा है कि पैकेज निर्धारित है। पूरक मांगों पर चर्चा के लिए सभी ने सहयोग देना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य में किसानों को इसी सत्र में राहत देने की घोषणा की जाएगी। राज्य सरकार ने किसानों को मदद के लिए केंद्र सरकार से 4500 करोड़ मांगे हैं। इस बीच खबर आई है कि राज्य सरकार ने केवल 3000 करोड़ रुपए की मांग की है।
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