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विधानमंडल शीतसत्र के पहले ही दिन आक्रामक भूमिका में आया विपक्ष

7 वर्ष पहले
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नागपुर. राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र सोमवार को उपराजधानी में शुरू हुआ। पहले दिन पारंपरिक तौर से शोक प्रस्ताव पर ही चर्चा हो पाई। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सभा दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन पहले दिन किसानांे की समस्याअों को लेकर िवपक्ष ने जाे तेवर देखाएं, उससे सत्र के हंगामेदार रहने के आसार साफ दिखाई देने लगे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुरुआत में मंत्रिमंडल सदस्यों का परिचय कराया।

इसके बाद विधानसभ अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने तािलका सभापतियांे के नामों की घोषणा की। इसके बाद कांग्रेस के गट नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने कृषि संकट व किसान आत्महत्या विषय पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए निवेदन किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे खारिज कर दिया। वहीं विधानपरिषद की कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। किसानों के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की। इसे लेकर जोरदार नारेबाजी हुई। हंगामे के कारण कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

विपक्ष का कहना था कि सदन का सारा कामकाज परे रख नियम 289 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव लाकर किसानों के मुद्दे पर चर्चा कराई जाए। इस पर कृषि मंत्री एकनाथ खडसे ने कहा, ‘किसानों के मुद्दे पर हम गंभीर हैं, पर कामकाज भी जरूरी है। उन्होंने विधानपरिषद सभापति को नियम 207 अंतर्गत चर्चा कराने का प्रस्ताव दिया और कहा कि अब इसी नियम अंतर्गत किसानों मुद्दे पर चर्चा होगी।
सड़क से सदन तक गूंजा किसानों की समस्याओं का मुद्दा
ये होंगे तालिका सभापति
विधानसभा : अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने 5 सदस्यों को तालिका सभापति नियुक्त किया है। इनमें कांग्रेस सदस्य वर्षा गायकवाड़, शिवाजीराव नाइक, योगेश सागर, दिलीप सोपल शामिल हैं।
विधान परिषद : सभापति देशमुख की अनुपस्थिति में रामनाथ मोते, गोपीकिशन बाजोरिया, जयंत जाधव, चंद्रकांत रघुवंशी तालिका सभापति के रूप में कार्यवाही का संचालन करेंगे।
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