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राकांपा- कांग्रेस नेताओं की मांग कर्ज माफ करो, नहीं तो दो आत्महत्या की अनुमति

7 वर्ष पहले
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नागपुर. दो दिन से सूखे और किसान आत्महत्या पर चल रहा विधानपरिषद में हंगामा तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को विधानपरिषद की कार्यवाही आरंभ होते ही कांग्रेस-राकांपा ने एकजुट होकर सरकार पर हल्ला बोला। विपक्ष के इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे की स्थिति को देखते हुए सभापति ने मध्यस्था की। जिसके बाद सूखे पर विधानपरिषद में चर्चा शुरू हुई। विप के वरिष्ठ सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने सूखे व किसान आत्महत्या पर नियम 260 अंतर्गत चर्चा का प्रस्ताव रखा। श्री ठाकरे ने कहा कि पिछले दो महीने में राज्य में सर्वाधिक किसान आत्महत्या हुई है।
पहले कभी दो महीने में आत्महत्या की खबरें सुनने मिलती थीं। अब रोजाना 15-20 किसान द्वारा अलग-अलग जगहों पर आत्महत्या किए जाने की खबरें आ रही हैं। आत्महत्या होने के बावजूद सरकार राहत देने में क्यों पीछे है। क्या सरकार निर्णय लेने में सक्षम नहीं है? इसे स्पष्ट करना चाहिए। भाजपा-सेना युति को घेरते हुए ठाकरे ने कहा कि केंद्रीय कपास मंत्री सूखा प्रभावित क्षेत्र में दौरे पर है। केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि कपास उत्पादन क्षेत्र में आत्महत्या नहीं हुई है? केंद्रीय मंत्री का यह बयान किसानों का मजाक उड़ाने वाला है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर राज्य सरकार सूखा घोषित करती है तो केंद्र को मदद देने में कोई आपत्ति नहीं है।
सूखा घोषित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। अगर केंद्र तैयार है तो राज्य सरकार क्यों पीछे है। माणिकराव ठाकरे ने कहा कि सरकार को आर्थिक स्थिति का रोना, रोना बंद करना चाहिए। तुरंत पैकेज घोषित कर, आत्महत्या रोकी जानी चाहिए। श्री ठाकरे ने राज्य सरकार को केंद्र सरकार के भरोसे न रहकर, स्वयं निर्णय लेने की भी सलाद दी। राकांपा सदस्य धनंजय मुंडे ने किसानों की स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार से तुरंत पैकेज घोषित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य में स्थिति काफी बिकट है। लगभग 2 हजार किसानों ने मुख्यमंत्री से आत्महत्या करने की अनुमति मांगी है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार कुछ नहीं कर सकती है तो हमें कुछ करने दें। कांग्रेस सदस्य राजेंद्र मुलक, भाजपा सदस्य शोभाताई फडणवीस, कैबिनेट मंत्री नीलम गोर्हे ने भी किसानों की स्थिति पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
अधिकारी की अनुपस्थिति पर सभा स्थगित
सूखे पर चर्चा के दौरान धनंजय मुंडे अपनी बात रख रहे थे। किन्तु इस समय संबंधित विभाग का कोई मंत्री या अधिकारी उपस्थित नहीं होने पर कांग्रेस के भाई जगताप ने आपत्ति जताई। अन्य विपक्षी सदस्यों ने मंत्री और अधिकारी की अनुपस्थिति को गलत ठहराते हुए जमकर हंगामा मचाया। सुनील तटकरे ने कहा कि न मंत्री नोटिंग कर रहे और न अधिकारी। फिर सुन कौन रहा है। उन्होंने त्वरित सदन की कार्यवाही रोकने की मांग की। उपसभापति वसंत डावखरे ने 10 दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित की। किन्तु इसे लेकर परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने कड़ी आपत्ति जताई। श्री रावते ने कहा कि सदन की कार्यवाही रोकना गलत है। एकनाथ खडसे ने भी किस वजह से सदन की कार्यवाही रोकी गई, इसपर उपसभापति से स्थिति स्पष्ट करने का निवेदन किया।
राज्यपाल को रोकने वाले कर रहे अभिनंदन
विधानपरिषद में राज्यपाल विद्यासागर राव के अभिभाषण पर सत्तापक्ष ने अभिनंदन प्रस्ताव लाया। प्रस्ताव का विरोध करते हुए राकांपा के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे ने कहा कि जिन्होंने राज्यपाल को विधानभवन के अंदर जाने से रोका था, वे ही आज राज्यपाल के अभिभाषण प्रस्ताव का अभिनंदन रख रहे हैं, लेकिन किसी ने अनुमोदन नहीं किया। शिवसेना पर कटाक्ष करते हुए श्री तटकरे ने कहा कि सेना के विधायक ही राज्यपाल की राह में रोड़ा बने थे। अब भाजपा के प्रस्ताव पर सेना अभिनंदन कर रही है। इसी शिवसेना के नेताओं ने सत्ता में शामिल होने से पहले कृषि मंत्री एकनाथ खडसे पर तरह-तरह की बयानबाजी की। अजीबोगरीब स्थिति है।
मुख्यमंत्री को लेकर संभ्रम
तटकरे ने भाजपा नेताओं पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कौन मुख्यमंत्री है यह समझ में नहीं आता। कोई भी नेता चैनल के सामने जाकर घोषणा करता है। राज्यपाल के अभिभाषण के अभिनंदन का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन भाषण में कहीं भी सूखे या एलबीटी का जिक्र नहीं किया गया। इसके विपरीत पिछले एक महीने में किसानों की आत्महत्या बढ़ी है। सरकार के प्रति किसानों में जो भावना निर्माण होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। उसके बजाय किसान आत्महत्या कर रहे है। राज्य की खाली तिजोरी होने का उल्लेख बार-बार किया जा रहा है, लेकिन 1995-96 में युति सरकार ने क्या स्थिति कर रखी थी, इसका उल्लेख करना उचित नहीं है। बावजूद इसके गुजरात की तुलना में महाराष्ट्र की स्थिति अच्छी है। गुजरात पर हमसे ज्यादा कर्ज है।
पृथक विदर्भ का विरोध
राकांपा नेता सुनील तटकरे ने अपने भाषण में पृथक विदर्भ की मांग का विरोध करते हुए कहा कि शरीर में खून की अंतिम बूंद तक महाराष्ट्र के दो टुकड़े नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि नितीन गडकरी ने कहा था कि हमारी सरकार आने पर विदर्भ बनाया जाएगा। दूसरी ओर यह भी कहा कि 105 लोगों ने संयुक्त महाराष्ट्र के लिए अपना बलिदान दिया। ऐसे में सरकार की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार में भाजपा प्रणित राज्यों ने जीएसटी का विरोध किया, लेकिन वे अब केंद्र के इशारे पर जीएसटी का समर्थन कर रहे हैं। तटकरे ने कहा कि हमने किसानों को 200 रुपए बोनस दिया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने बोनस बढ़ाने की बजाय उसे रद्द कर दिया। इन सारे मुद्दों पर सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।