नागपुर. चुनाव में पुनर्मतदान की मांग वैसे भी जीतने वाले उम्मीदवार के दिल की धड़कने बढ़ा देती है। जहां गुंजाइश हो, वहां अवश्य पुनर्मतदान होता है। ऐसी नौबत बहुत कम आती है। किन्तु पिछली दफा नागपुर को इसका सामना करना पड़ा था। 2009 के विधानसभा चुनाव में मध्य नागपुर के एक बूथ पर पुनर्मतदान हुआ था। 13 अक्टूबर 2009 को मतदान के दिन इस बूथ पर 23 वोट अतिरिक्त दर्ज हुए थे।
जिसके बाद प्रशासन त्वरित सक्रिय हुआ था। तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी प्रवीण दराडे ने मध्य नागपुर निर्वाचन क्षेत्र के बूथ क्रमांक 231, नवाबपुरा स्थित जामदार मुलींची शाला में पुनर्मतदान करने का निर्णय लिया था। रातों-रात क्षेत्र में दवंडी पीटकर नागरिकों को इसकी सूचना दी गई थी। दूसरे दिन सुबह से मतदान केंद्र पर वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। दिन भर दोनों पार्टी के उम्मीदवार केंद्र पर डटे रहे। दोनों बेचैन और दिल की धड़कने बढ़ी थी। विशेष यह कि पहली बार मतदान में बूथ पर 490 वोट पड़े थे।
दूसरी बार हुई वोटिंग में भी 490 वोट ही पड़े। 258 पुरुष और 232 महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। इसे संयोग ही माना गया था। हालांकि इस वोटिंग का विजयी उम्मीदवार पर खासा असर नहीं पड़ा। मध्य नागपुर से भाजपा के उम्मीदवार विकास कुंभारे 56 हजार 312 वोट लेकर विजेता चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस के राजू देवघरे को 10 हजार 791 मतों से मात दी थी। हालांकि यह रहस्य अभी भी बना है कि वे 23 अतिरिक्त वोट कहां से आए थे। अधिकारियों ने अभी तक इसका खुलासा नहीं किया है।
गड़चिरोली जिले के 22 केंद्रों पर अलग से मतदान
मध्य नागपुर छोड़ दिया जाए तो विदर्भ के अन्य किसी निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान की नौबत नहीं आयी थी। हां, गड़चिरोली जिले के 22 मतदान केंद्रों पर आम चुनाव के तीसरे दिन अलग से मतदान प्रक्रिया की गई थी। यह 22 मतदान केंद्र अति-दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में होने से सुरक्षा को ध्यान में रखकर यहां मतदान अलग तिथि पर लिया गया था। 4 बजे तक यहां मतदान कराया गया था। शांतिपूर्ण मतदान हुआ। इस चुनाव में तत्कालीन जिलाधिकारी अतुल पाटणे के प्रबंधन की सराहना भी हुई। उन्होंने ही गड़चिरोली खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 4 बजे तक वोटिंग करने का सुझाव दिया था। जिसे चुनाव आयोग ने मान्य भी किया और सफलता के साथ चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।