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तलंगाना निकला आगे, विदर्भ पिछड़ा

8 वर्ष पहले
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नागपुर। संप्रग ने तेलंगाना पर सहमति जैसे ही जताई, मन चिंहुक उठा। काश, पृथक विदर्भ की घोषणा भी होती। सोचने और मंथन का यह क्षण है कि आखिर विदर्भ क्यों हाथ मलता रहा? क्यों हमारे हिस्से में ऐसी खुशी नहीं आई? क्या हम तेलंगाना समर्थकों की तरह जिद पैदा कर सके? पृथक विदर्भ राज्य की मांग तेलंगाना से काफी पुरानी है। फिर भी विदर्भ का विचार तक नहीं हो पाया। नेताओं की राय भले ही अलग-अलग हो, लेकिन आम राय यही है कि पीछे से आकर तेलंगाना आगे निकल गया और विदर्भ पिछड़ गया। कई कारण है। तेलंगाना की अपेक्षा यहां के आंदोलन में पैनापन कम रहा और हम आंदोलन में कम पड़े। नेताओं के साथ ही सियासी पार्टियों की भूमिका भी समय देख बदलती रही। बहरहाल, तेलंगाना पर सहमति के साथ ही पृथक विदर्भ राज्य की मांग फिर जोर पकड़ रही है।

अंदर-अंदर सुलग रही है आग

भाजपा नेता पूर्व सांसद बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि तेलंगाना की अपेक्षा विदर्भ की मांग काफी पुरानी व प्रभावी है। आंदोलन में हम कहीं कम पड़े हंै। भाजपा विदर्भ राज्य चाहती है। पार्टी की भूमिका छोटे राज्यों के पक्ष में है, पर एनडीए के साथी शिवसेना के कारण पार्टी को कई बार इस मुद्दे पर परेशानी होती है। तेलंगाना की अपेक्षा यहां सारी सुविधा उपलब्ध है। नए राज्य के लिए राजधानी की भी समस्या नहीं है। मुखर्जी समिति की सिफारिश पर भी विचार नहीं हुआ। विदर्भ की आग अंदर-अंदर सुलग रही है और चिंगारी कभी भी भड़क सकती है।

पृथक विदर्भ हर हाल में लेकर रहेंगे

विदर्भवादी नेता पूर्व सांसद जांबुवंतराव धोटे ने कहा कि कांग्रेस सत्ता की राजनीति कर रही है। तेलंगाना राज्य को हरी झंडी मिलने का स्वागत है, लेकिन कांग्रेस ने तेलंगाना के साथ ही विदर्भ का भी विचार करना चाहिए। विदर्भ की

मांग काफी पुरानी है। पृथक विदर्भ हर हाल में लेकर रहेंगे। यहां नेताओं का आंदोलन हर समय अंतिम लक्ष्य तक नहंीं पहुंच सका। नेता जनता की कसौटी पर सौ फीसदी खरे नहीं उतरे। हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

धार नहीं मिल सकी

कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री रणजीत देशमुख ने कहा कि हम आंदोलन में पीछे रहे। आंदोलन को तेलंगाना की तरह धार नहीं मिल सकी। विदर्भ आर्थिक रूप से सक्षम है। नए राज्य को यहां आर्थिक परेशानी नहीं होगी। तेलंगाना के पहले ही विदर्भ का विचार होना चाहिए था। कांग्रेस ने पृथक विदर्भ की मांग पूरी करनी चाहिए।
विदर्भ के साथ अन्याय
कांग्रेस नेता रोगायो मंत्री डा. नितीन राऊत ने कहा कि विदर्भ के साथ अन्याय हुआ है। पृथक विदर्भ राज्य होना ही चाहिए। सालों पुरानी इस मांग पर विचार होना ही चाहिए।

कांग्रेस की मंशा ठीक नहीं

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि तेलंगाना के साथ पृथक विदर्भ राज्य बनना चाहिए। कांग्रेस इसमें राजनीति कर रही है। विदर्भ के प्रति कांग्रेस की मंशा ठीक नहीं है। भाजपा पहले ही विदर्भ का प्रस्ताव राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पास कर चुकी है।

पृथक विदर्भ समय की मांग

भाजपा शहर अध्यक्ष विधायक कृष्णा खोपडे ने कहा कि पृथक विदर्भ समय की मांग है। कांग्रेस जानबुझकर विदर्भ का मुद्दा प्रलंबित रख रही है। 1953 के फजल कमेटी करार के अनुसार तेलंगाना के साथ विदर्भ राज्य बनना चाहिए। सत्ता से दूर जाने पर कांग्रेसियों को विदर्भ की याद आती है। विदर्भ के कांग्रेिसयों ने केंद्र में इसके लिए दबाव बनाकर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस विधानसभा में अगर पृथक विदर्भ का प्रस्ताव लाएगी तो भाजपा उसे पूरा साथ देगी।

सियासी पार्टियों का आंदोलन दिखावा

विदर्भवादी नेता अहमद कादर ने कहा कि कांग्रेस, भाजपा दोनों पृथक विदर्भ के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। दोनों ही पार्टियों इस पर राजनीति कर रही है। अगर ये दोनों पार्टियां चाहे तो ये मांग कभी भी पूरी हो सकती है। सियासी पार्टियों के आंदोलन भी महज दिखावा है। नेताओं पर से जनता का विश्वास उठ चुका है। अब जनता को ही सड़क पर आकर आंदोलन अपने हाथ में लेना पड़ेगा।

नेताओं ने धोखा दिया

पूर्व पुलिस अधिकारी प्रवीर चक्रवर्ती का कहना है कि पृथक विदर्भ की मांग पीछे रहने के कई कारण है। यहां की जनता भोली-भाली है। नेताओं ने धोखा दिया है। नेताओं पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता। भय और लालच में हमेशा ही नेताओं ने अपनी भूमिका बदली है। जनता को खुद आंदोलन की कमान अपने हाथ में लेने का समय आ गया है। जनता से ही नेता आगे आएगा। विदर्भ का शोषण हो रहा है।

विदर्भ को भी स्वतंत्र राज्य घोषित करें

पृथक राज्य के रूप में तेलंगाना को मंजूरी मिलने का सामाजिक कार्यकर्ता उमेश चौबे ने स्वागत किया है। मंगलवार को पत्र परिषद में उन्होंने विदर्भ को भी स्वतंत्र राज्य घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि विदर्भ की मांग सबसे पुरानी हैै। इसे लेकर काफी आंदोलन भी हुए, लेकिन सरकार ने हमेशा इसे नजरअंदाज ही किया है। नेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह मुद्दा पीछे रह गया है। पृथक विदर्भ की मांग मनवाने के लिए जनता से आंदोलन में सहभागी होने की उन्होंने अपील की।

दिल्ली में 5 को धरना

विदर्भ ज्वाइंट एक्शन कमेटी (वीजेएसी) पृथक विदर्भ की मांग को लेकर आगामी 5 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध मार्च करने जा रही है। इस विरोध मार्च में पूर्व विधायक वामनराव चटप, पूर्व नौकरशाह पीकेबी चक्रवर्ती, राजकुमार तिरपुड़े और दीपक नीलावर भाग लेंगे।

मुत्तेमवार ने फिर उठाई पृथक विदर्भ की मांग : हमारे नई दिल्ली ब्यूरो ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि पार्टी नेतृत्व तेलंगाना के साथ ही अलग विदर्भ राज्य बनाने की पुरानी मांग पर भी सहमति प्रदान करे। कांग्रेस सांसद ने पृथक विदर्भ के गठन की मांग पर विचार करने संबंधी चि_ी प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी भेजी है। उन्होंने कहा है कि पृथक विदर्भ की मांग पूरी तरह जायज और सबसे पुरानी है, जिस पर विचार किया जाना चाहिए। नागपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले मुत्तेमवार ने कहा कि महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले विदर्भ काफी पिछड़ा हुआ है।