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फुटपाथ पर सोनेवालों को देंगे 'आश्रय'

7 वर्ष पहले
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नागपुर. रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं... अब निराश्रितों को ऐसा कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके लिए हिंगना स्थित प्रियदर्शनी महाविद्यालय के मोहम्मद तलहा ने सबसे सस्ता 'आश्रय' बनाया है। उन्होंने सस्ते, छोटे और चलते-फिरते 'आश्रय' को साकार किया है।

ऐसी है रचना

मो. तलहा ने बताया कि हाथ ठेले को ही घर का स्वरूप दे दिया गया है। ठेले के निचले भाग में सोने के लिए लकड़ी का तख्ता बनाया है। ठेले के ऊपर प्लास्टिक का शेड भी बनाया गया है, ताकि बरसात में किसी प्रकार की दिक्कत पेश नहीं आए। ठेले के नीचे बने तख्ते को जमीन से लगभग दो फुट ऊंचा बनाया है, ताकि जमीन पर घूमनेवाले कीड़े-मकोड़ों से बचा जा सके। तख्ते की लंबाई कम या ज्यादा भी की सकती है। शेड को भी खोला या बंद किया जा सकता है। इसमें लॉकर की भी व्यवस्था की व्यवस्था है। जब आराम नहीं करना हो तो ठेले का उपयोग सामान की बिक्री में किया जा सकता है।

गरीब को देना चाहूंगा

उन्होंने बताया कि 'आश्रय' अकेले व्यक्ति के लिए काफी अच्छा घर है। वह दोपहर और रात को इसमें आराम कर सकता है। इसे बनाने में 6000 रुपए का खर्च आया है। मैं इसे 4000 रुपए में बनाना चाहता हूं। पहला 'आश्रय' किसी गरीब को दान देना चाहता हूं। सभी आर्किटेक्चर से भी मेरा निवेदन है कि वे 'आश्रयÓ का निर्माण करें और जरूरतमंद को दान करें। इससे फुटपाथ पर कोई सोता हुआ दिखाई नहीं देगा।