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उम्मीदवार सूची को लेकर अनिश्चितता कायम, गठबंधनों को लेकर भी असमंजस

7 वर्ष पहले
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नागपुर. चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद भी राजनीतिक दलों में उम्मीदवारी को लेकर अनिश्चितता कायम है। किसी भी दल या गठबंधन ने उम्मीदवार घोषित नहीं किये हैं। लिहाजा, इच्छुक उम्मीदवारों के अलावा उनके समर्थक असमंजस की स्थिति में है। इस बीच विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं के बयानों से भी हलचल मच रही है। संभावित उम्मीदवारों की रणनीति तैयार नहीं हो पा रही है।

सोनिया गांधी विदेश में
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विदेश में है। उनकी अनुपस्थिति के कारण उम्मीदवार चयन का मामला अटका हुआ है। राज्य स्तर पर कांग्रेस उम्मीदवार चयन के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्रदेश कमेटी ने केंद्रीय उम्मीदवार चयन स्क्रीनिंग कमेटी को इच्छुक उम्मीदवारों की सूची भेज दी है। उम्मीदवारों के पैनल में कहीं 2 तो कहीं उससे अधिक नाम हैं। नागपुर शहर व जिले की सभी सीटों के लिए भी नाम भेजे गए हैं।
शनिवार को दिल्ली में पार्टी नेता मल्लिकार्जुन खडग़े की उपस्थिति में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होनेवाली थी। सूत्र बताते हैं कि सोनिया गांधी के विदेश में होने के कारण बैठक को टाल दिया गया है। 15 सितंबर के बाद ही बैठक होने की संभावना है। कांग्रेस में मंत्री नितीन राऊत की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी व अनीस अहमद जिन क्षेत्रों से चुनाव लडऩा चाहते हैं उनमें अन्य दावेदार भी सामने आये हैं। लिहाजा, इन पूर्व मंत्रियों की उम्मीदवारी के बारे में जानने की उत्सुकता अधिक है।
पश्चिम में विकास ठाकरे व दक्षिण पश्चिम में प्रफुल गुडधे पाटील के अलावा दक्षिण में विधायक दीनानाथ पडोले की उम्मीदवारी को लेकर भी उनके कार्यकर्ताओं में उत्सुकता है। राज्यमंत्री राजेंद्र मुलक को कहां से पार्टी उम्मीदवार बनाती है यह भी जानने कार्यकर्ता उत्सुक हैं। कई स्थानों पर अन्य दावेदारों ने काफी सक्रियता दिखायी है। अभी भी आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस के इच्छुक उम्मीदवार दिल्ली में डटे हैं। भाग्य से छींका टूटने की आस पूरी होगी या नहीं यह भी कार्यकर्ताओं में उत्सुकता का विषय है।
भाजपा में भी असमंजस
भाजपा में भी असमंजस की स्थिति बनी है। प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस व शहर अध्यक्ष कृष्णा खोपड़े की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। शेष क्षेत्रों के लिए टिकट दावेदारों की लंबी कतार है। उत्तर में तो भाजपा के टिकट दावेदारों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है। मध्य में भी डेढ़ दर्जन दावेदार हैं।
दक्षिण भले ही शिवसेना के कोटे में है। लेकिन इस बार भाजपा के कोटे में आने की उम्मीद कार्यकर्ताओं को है। इस क्षेत्र में आधा दर्जन टिकट दावेदार हैं। पश्चिम में विधायक सुधाकर देशमुख की टिकट खतरे में बतायी जा रही है। दत्ता मेघे के पुत्र समीर मेघे भी यहां से टिकट दावेदार हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में किसका नाम तय हो पाता है इस सवाल पर उत्सुकता का माहौल है। शिवसेना में भी टिकट दावेदार रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं।
दक्षिण नागपुर में 4 प्रमुख टिकट दावेदार हैं। गठबंधन तय नहीं हो पाने व उम्मीदवारी को लेकर सीधा संकेत नहीं मिल पाने के कारण कोई चुनाव कार्य में नहीं जुट पा रहा है। राकांपा के चुनाव लडऩे के इच्छुक नेताओं ने मुंबई के कई बार दौरे किये हैं। उम्मीदवारी तो दूर कांग्रेस के साथ सीट भागीदारी ही तय नहीं हो पाने के कारण अनिश्चिता का माहौल बना है। कुछ नेता तो निर्दलीय लडऩे की भी तैयारी करने लगे हैं।
अनिश्चितता के कारण छोटे दलों की रणनीति भी पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। बरिएम नेता सुलेखा कुंभारे ने नाराजी जताते हुए कांग्रेस से नाता तोडऩे की तैयारी की है। रिपा नेता रामदास आठवले विदर्भ में 5 सीटों की अपेक्षा रखते हैं। एक भी सीट नहीं मिलने का संकेत पाकर वे मुंबई लौट गए हंै। उनके समर्थक कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं। अन्य रिपा नेता प्रा.जोग्रेंद्र कवाडे का रुख भी साफ नहीं हो पाया है।
सबसे पहले उम्मीदवार घोषित करने का दावा करनेवाली बसपा के कदम भी ठहरे हुए हैं। कुछ नाम तय होने के बाद भी घोषित नहीं किये जा रहे हैं। उम्मीदवार साक्षात्कार प्रक्रिया जारी है। युति व आघाड़ी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तय नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि मुख्यमंत्री कांग्रेस का ही होगा। शिवसेना की ओर उनकी पार्टी का ही मुख्यमंत्री होने का बयान आ रहा है।